Climate Reparations: नेपाल का बड़ा कदम, भारत-चीन और अमेरिका से मांगे **$5 बिलियन**

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Climate Reparations: नेपाल का बड़ा कदम, भारत-चीन और अमेरिका से मांगे **$5 बिलियन**

नेपाल ने हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत, चीन और अमेरिका से **$5 बिलियन** के क्लाइमेट रिपेरेशन (Climate Reparations) की औपचारिक मांग की है। इस आपदा में **1,100** से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और अब नेपाल मानवीय सहायता से आगे बढ़कर कानूनी जवाबदेही पर जोर दे रहा है।

आर्थिक तबाही और जीडीपी पर चोट

नेपाल के फाइनेंस मिनिस्टर स्वर्णम वागले के अनुसार, पुनर्निर्माण (Reconstruction) की कुल लागत $4 बिलियन से $5 बिलियन के बीच होने का अनुमान है। यह राशि नेपाल की कुल जीडीपी का लगभग 10% है। जिसे अधिकारी 'हिमालयन सुनामी' बता रहे हैं, उस आपदा ने भोटेकोशी बेसिन, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

कानूनी दांव और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका

नेपाल के फॉरेन मिनिस्टर शिशिर खनल का कहना है कि वे भारत, चीन और अमेरिका को नैतिक और कानूनी रूप से जवाबदेह मानते हैं। उनका तर्क है कि ये देश ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के बड़े स्रोत हैं, जबकि नेपाल का योगदान न के बराबर है। नेपाल अब इस मामले को न्यूयॉर्क में होने वाली यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में मजबूती से रखने की तैयारी कर रहा है। सरकार ने 'फंड फॉर रिस्पॉन्डिंग टू लॉस एंड डैमेज' से भी मदद की गुहार लगाई है ताकि फंड जल्दी मिल सके।

भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risks)

नेपाल का यह आक्रामक रुख आने वाले समय में कूटनीतिक तनाव बढ़ा सकता है। भारत और चीन नेपाल के प्रमुख व्यापारिक सहयोगी हैं, इसलिए उनकी प्रतिक्रिया पर दुनिया भर की नजरें हैं। साथ ही, अभी तक यूएन का यह फंड पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं है, जिससे वित्तीय मदद मिलने में देरी होने की पूरी आशंका बनी हुई है। निवेशकों और मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए आगामी यूएन सत्र के घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.