नेपाल में **27 सितंबर** तक के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जो अगस्त की आपदा से प्रभावित इलाकों के लिए नई चुनौती है। यह स्थिति भारत की दिग्गज कंपनियों के क्रॉस-बॉर्डर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और सप्लाई चेन के लिए बड़ा रिस्क पैदा कर रही है।
नेपाल के डिपार्टमेंट ऑफ हाइड्रोलॉजी एंड मेट्रोलॉजी ने 25 सितंबर से 27 सितंबर तक पूरे देश में भारी बारिश की चेतावनी दी है। यह अलर्ट ऐसे समय में आया है जब नेपाल अभी भी 26 अगस्त को आई भयावह ग्लेशियर आपदा से उबरने की कोशिश कर रहा है, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी और बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुँचा था।
हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय हाइड्रोपावर सेक्टर है। भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा व्यापार काफी मजबूत है, और SJVN, NHPC और GMR Infrastructure जैसी बड़ी कंपनियां यहां बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। पूर्व की बाढ़ के कारण पहले ही कई हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। नई चेतावनी के चलते प्रोजेक्ट्स पूरा होने में देरी और लेबर-मशीनरी की आवाजाही में बड़ी बाधा आने की आशंका है।
ऑपरेशनल और सप्लाई चेन रिस्क
मौजूदा मानवीय संकट के चलते लगभग 8,000 कर्मी मलबे को हटाने में लगे हैं। करीब 2.2 मिलियन टन मलबा जमा होने से ट्रांसपोर्ट रूट पूरी तरह ठप हैं, जिससे भारी उपकरणों को साइट तक पहुँचाना मुश्किल हो गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मौसम ने साथ नहीं दिया, तो प्रोजेक्ट्स के कमीशनिंग शेड्यूल में देरी तय है।
क्षेत्रीय ऊर्जा स्थिरता पर नजर
भारत, नेपाल से बिजली का आयात करता है और क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइनों के जरिए इसे बढ़ाने की योजना है। ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुंचा कोई भी नुकसान भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकता है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि कंपनियां क्या Force Majeure या प्रोजेक्ट टाइमलाइन में बदलाव जैसी कोई घोषणा करती हैं या नहीं।
