Nepal के प्रधानमंत्री Balendra Shah आगामी 24 सितंबर को UN जनरल असेंबली में हिस्सा लेंगे। हाल ही में आए विनाशकारी हिमस्खलन और बाढ़ के बाद वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुआवजे और वित्तीय मदद की मांग करेंगे। इस आपदा में **1,300** से ज्यादा लोगों की जान गई है, जिससे बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को भारी नुकसान पहुंचा है।
आर्थिक मोर्चे पर तगड़ा झटका
बीते 26 अगस्त को आए आइस-रॉक एवलांच के कारण नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में तबाही मच गई है। सड़कों, पुलों और ऊर्जा संपत्तियों के नष्ट होने से बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ है। जो निवेशक हिमालयी क्षेत्र में ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाए हुए हैं, उनके लिए अब अनिश्चितता का दौर शुरू हो गया है। नेपाल कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, लेकिन अब सरकार का पूरा बजट राहत और पुनर्निर्माण की ओर शिफ्ट हो गया है।
निवेशकों के लिए जरूरी सतर्कता
नेपाल सरकार फिलहाल नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर रही है। ऐसे में हाइड्रोपावर और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में देरी की आशंका बनी हुई है। निवेशकों को सलाह है कि वे इन प्रोजेक्ट्स के अपडेट पर नजर रखें, क्योंकि सरकारी फंड की कमी इन योजनाओं को प्रभावित कर सकती है। पुनर्निर्माण की भारी लागत और सरकार की अंतरराष्ट्रीय फंड जुटाने की क्षमता पर ही कारोबार की बहाली निर्भर करेगी।
क्लाइमेट जस्टिस पर जोर
नेपाल सरकार इस संकट को 'क्लाइमेट जस्टिस' के तौर पर पेश करने की तैयारी में है। सरकार का तर्क है कि ग्लोबल क्लाइमेट चेंज के कारण नेपाल को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, जबकि कार्बन उत्सर्जन में उसका योगदान बहुत कम है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मदद कब तक मिलेगी, यह अभी साफ नहीं है, लेकिन देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) के लिए यह एक बड़ा परीक्षण है।
