नेपाल में मानसून की जबरदस्त बारिश ने कोहराम मचा दिया है। अब तक **27** लोगों की जान जा चुकी है और **31** पुल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट और भारत-नेपाल व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान
24 सितंबर से जारी बारिश ने नेपाल में भारी इंफ्रास्ट्रक्चर संकट पैदा कर दिया है। 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' के अनुसार, लैंडस्लाइड और बाढ़ ने स्थानीय ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को तहस-नहस कर दिया है। कालिगंडकी जैसे प्रमुख रोड कॉरिडोर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
क्यों आई यह आफत?
उत्तरी भारत में बने लो-प्रेशर जोन ने बंगाल की खाड़ी से नमी खींची, जिसके चलते भयानक बारिश हुई। नवाल्परासी में 544 मिमी और कास्की के कुछ हिस्सों में 500 मिमी से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। इस आपदा में 1,000 से ज्यादा परिवार बेघर हो गए और 200 से अधिक घर जमींदोज हो गए हैं।
ट्रेड और लॉजिस्टिक्स पर असर
भारत और नेपाल के बीच सामान की आवाजाही पर इसका सीधा असर पड़ा है। हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं अक्सर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और कंस्ट्रक्शन में देरी लाती हैं। कालिगंडकी जैसे रास्तों के बंद होने से सप्लाई चेन में देरी और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी तय है।
आगे क्या?
फिलहाल नेपाली सेना और पुलिस जाजरकोट, म्याग्दी और बाग्लुंग जैसे दुर्गम इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पर बड़ा खर्च आने वाला है और इस तरह के क्लाइमेट रिस्क के कारण पहाड़ी इलाकों में भविष्य की प्लानिंग को और अधिक सुरक्षित (Resilient) बनाना होगा।
