नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से बुनियादी ढांचे को तगड़ा झटका लगा है। Upper Trishuli-1 जैसे प्रमुख हाइड्रोजेन प्रोजेक्ट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, और रिकंस्ट्रक्शन का खर्च **$5 बिलियन** तक पहुंचने का अनुमान है।
बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में जहां क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर चर्चा हुई, वहीं नेपाल की त्रासदी ने पूरे रीजन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत तमाम नेताओं ने आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम के खिलाफ एकजुट होने का संकल्प लिया, लेकिन नेपाल में ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ ने हालात को गंभीर बना दिया है।
बड़े आर्थिक नुकसान का अनुमान
इस आपदा में अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 4,000 लोग लापता हैं। नेपाल के उद्योगपति विनोद चौधरी ने संकेत दिए हैं कि केवल बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए ही करीब $5 बिलियन की भारी-भरकम राशि की आवश्यकता होगी। इसमें Upper Trishuli-1 हाइड्रोजेन प्रोजेक्ट को हुआ नुकसान सबसे चिंताजनक है, जहां सैकड़ों वर्कर लापता हैं और भारी मशीनरी पूरी तरह नष्ट हो गई है।
एनर्जी सेक्टर पर असर
नेपाल पावर एक्सपोर्ट करने के अपने मिशन पर काम कर रहा था, लेकिन इस तबाही ने एनर्जी सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्रॉस-बॉर्डर पावर प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन पर इसका क्या असर पड़ेगा। प्रोजेक्ट साइट्स पर काम रुकने और इंश्योरेंस क्लेम्स में देरी के कारण डेवलपर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स के फाइनेंशियल आउटलुक पर दबाव बढ़ने की आशंका है। फिलहाल, इंटरनेशनल सपोर्ट और रिकंस्ट्रक्शन की रफ्तार ही तय करेगी कि रीजन की इकोनॉमी कब तक पटरी पर लौटती है।
