नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी ग्लेशियर फ्लड में मरने वालों की संख्या **1,200** के पार पहुंच गई है। इस आपदा ने देश के पावर ग्रिड की **10%** क्षमता को तबाह कर दिया है, जिससे सरकार अब अंतरराष्ट्रीय 'क्लाइमेट कंपेनसेशन' की मांग करने पर मजबूर हो गई है।
नेपाल वर्तमान में 26 अगस्त, 2026 को लैंगटांग लिरुंग (Langtang Lirung) पीक पर हुई ग्लेशियर आपदा के बाद सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। 3 सितंबर, 2026 तक, इस हादसे में 1,200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4,200 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
पावर सेक्टर पर तगड़ी चोट
मानवीय त्रासदी के अलावा, इस आपदा ने नेपाल के हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को गहरा जख्म दिया है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, फ्लैश फ्लड और मलबे के कारण लगभग 281 मेगावाट (MW) की ऑपरेशनल क्षमता और 388 MW की निर्माणाधीन क्षमता को नुकसान पहुंचा है। यह नेपाल के कुल पावर ग्रिड का लगभग 10% हिस्सा है। कई प्रोजेक्ट्स की टनल में अभी भी 900 के करीब लोग फंसे होने की आशंका है, जो देश के क्लीन एनर्जी लक्ष्य के लिए एक बड़ा झटका है।
सरकार की नई कूटनीति
इस तबाही की रिकवरी में अरबों डॉलर का खर्च आने का अनुमान है। इसे देखते हुए नेपाली सरकार ने अब अपनी कूटनीतिक रणनीति बदल ली है। अधिकारी अब औद्योगिक देशों से 'क्लाइमेट कंपेनसेशन' (जलवायु मुआवजा) की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यह कोई स्थानीय घटना नहीं, बल्कि ग्लोबल क्लाइमेट चेंज का परिणाम है।
अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां
पुनर्निर्माण (Reconstruction) के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता होगी, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। हिमालयी क्षेत्र में भविष्य में भी 'ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOFs) का खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए निवेशकों की नजरें अब सरकार के राहत और पुनर्निर्माण कार्यों पर टिकी हैं।
