नेपाल में भीषण बाढ़ और ग्लेशियर फटने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस आपदा में अब तक **987** लोगों की जान जा चुकी है और **3,900** से ज्यादा लोग लापता हैं। इसका असर भारत की कई बड़ी कंपनियों और इंश्योरेंस सेक्टर पर भी पड़ने की आशंका है।
तबाही का मंजर
26 अगस्त को हुए ग्लेशियर कोलैप्स और उसके बाद आई बाढ़ ने नेपाल के 8 जिलों में भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है, लेकिन मलबे में दबे टनल और क्षतिग्रस्त रास्तों की वजह से राहत कार्यों में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पावर सेक्टर और इंफ्रा पर असर
इस आपदा में 12 से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। पावर जनरेशन और ट्रांसमिशन नेटवर्क क्षतिग्रस्त होने से पूरे क्षेत्र में बिजली संकट गहरा सकता है, जिसका सीधा असर वहां मौजूद मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल यूनिट्स पर पड़ेगा।
भारतीय कंपनियों पर संकट
भारतीय निवेशकों के लिए यह एक चिंता का विषय है, क्योंकि नेपाल में काम करने वाली कई कंपनियों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। Dabur India जैसी कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक्स में बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। नेपाल-चीन बॉर्डर के पास सड़कें और पुल टूटने से कच्चे माल की आवाजाही थम गई है।
इसके अलावा, इंश्योरेंस कंपनियों के लिए भी चुनौतियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि प्रभावित इलाकों में प्रॉपर्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर डैमेज के चलते क्लेम की संख्या में भारी उछाल आने की उम्मीद है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब इस पर नजर बनाए हुए हैं कि रिकवरी में कितना समय लगेगा और ट्रेड रूट्स को कब तक बहाल किया जा सकेगा।
