नेपाल के रसुवा जिले में ग्लेशियर फटने से भीषण आपदा आई है, जिसमें **157** लोगों की जान चली गई है। **12** हाइड्रोपावर प्लांट और **19** पुल तबाह हो गए हैं, जिससे नेपाल स्टॉक एक्सचेंज में भारी बिकवाली देखी गई है। वहीं, भारत में गंडक नदी बेसिन के कारण बिहार और यूपी में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
तबाही का मंजर
नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवा जिले में ग्लेशियर फटने की इस घटना ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 26 अगस्त 2026 को हुई इस त्रासदी में अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बुनियादी ढांचे के स्तर पर देखें तो 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़कें बह गई हैं। इसके अलावा 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे क्षेत्र में बिजली उत्पादन और व्यापार पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बाजार पर असर (Market Reaction)
इस आपदा का सीधा असर नेपाल के फाइनेंशियल मार्केट पर दिखा है। 26 अगस्त 2026 को नेपाल स्टॉक एक्सचेंज (NEPSE) में 35.92 अंक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में डर है कि पावर प्रोजेक्ट्स के नुकसान और भारी बीमा दावों (Insurance Claims) के चलते कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर (Rasuwagadhi Hydropower) जैसे स्टॉक्स में तो लोअर सर्किट तक लग गया है।
भारत के लिए चुनौती
भारत के पड़ोसी राज्यों, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए प्रशासन ने हाई-अलर्ट घोषित कर दिया है। जल विज्ञान विशेषज्ञ गंडक और नारायणी नदी के बेसिन पर लगातार नजर रखे हुए हैं। नेपाल की ओर से आने वाले पानी के बहाव और मलबे के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निकासी प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि जान-माल की सुरक्षा की जा सके।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की बहाली कितनी जल्दी होती है और बीमा कंपनियों को कुल कितना नुकसान उठाना पड़ता है।
