नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। तिब्बत में बनी एक झील के टूटने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे पावर प्रोजेक्ट्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को **$5 बिलियन** से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है।
नेपाल इस समय एक गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। भोते कोशी और त्रिशूली नदी के पास के इलाकों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। वहीं, तिब्बत में चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर बनी एक झील अब एक बड़े खतरे के रूप में उभरी है। चीनी प्रशासन ने 'लेवल-IV' का इमरजेंसी अलर्ट जारी किया है, क्योंकि झील के ओवरफ्लो होने से निचले इलाकों में खतरा और बढ़ गया है।
विनाश का पैमाना
26 अगस्त, 2026 को शुरू हुए इस जलप्रलय में अब तक 469 लोगों की जान जा चुकी है और 1,400 से ज्यादा लोग लापता हैं। बाढ़ ने देश की जीवनरेखा माने जाने वाले सड़कों के नेटवर्क, पुलों और बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है।
अर्थव्यवस्था पर असर
इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट और बिजनेस लीडर विनोद चौधरी का कहना है कि बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए कम से कम $5 बिलियन की लागत आएगी। इस आपदा के कारण बिजली उत्पादन ठप हो गया है और सीमा पार ऊर्जा व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़कों के कट जाने से रसद (Logistics) और ट्रेड फ्लो पूरी तरह बाधित है। इसके अलावा, दिल्ली-काठमांडू बस सेवा को भी फिलहाल बंद कर दिया गया है।
फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन कीचड़ और मलबे के कारण मुश्किलें बढ़ रही हैं। इन्वेस्टर्स की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कितनी जल्दी देश का पावर और ट्रांसपोर्ट सेक्टर दोबारा पटरी पर लौटता है।
