तिब्बत में ग्लेशियर फटने से आए भयानक सैलाब ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। इस त्रासदी में अब तक **469** लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। बुनियादी ढांचे और पावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है।
बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र को भारी नुकसान
बाढ़ का असर सिर्फ जनजीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने नेपाल की रीढ़ माने जाने वाले बुनियादी ढांचे को भी तोड़कर रख दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 पुल पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं और 40 किलोमीटर से अधिक सड़कों का नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में बड़ी चुनौती आ रही है। ऊर्जा क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ा है, जहां 'चिमिली प्रोजेक्ट' (Chimile project) और एक 220kv सबस्टेशन को गंभीर क्षति पहुंची है, जिससे पावर ग्रिड पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव
चितवन और कास्की जैसे प्रभावित जिलों के अस्पताल अब अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा मरीजों का बोझ उठा रहे हैं। अस्पतालों में जगह की भारी कमी के कारण भारतपुर में 'इंडस्ट्रियल एंटरप्राइज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट' की इमारत को अस्थायी स्टोरेज सेंटर में बदलना पड़ा है। सब-जीरो स्टोरेज की कमी के चलते प्रशासन को ड्राई आइस जैसे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है।
राहत और आर्थिक प्रभाव
मानवीय संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने $2 मिलियन की इमरजेंसी फंडिंग जारी की है। बाढ़ ने न केवल जान-माल का नुकसान किया है, बल्कि सीमावर्ती व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कस्टम ऑफिसों को भी बड़ी चोट पहुंचाई है। फिलहाल सरकार का मुख्य फोकस बुनियादी ढांचे की बहाली और बिजली परियोजनाओं की मरम्मत पर है, ताकि ठप पड़ी अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाया जा सके।
