नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी बाढ़ ने पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर दिया है, जिससे नेशनल ग्रिड से **430 MW** बिजली का उत्पादन ठप हो गया है। इस आपदा के चलते Nepal Stock Exchange (NEPSE) में हाइड्रोज़पावर शेयरों में भारी गिरावट देखी गई और कई कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गए हैं।
नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार, 26 अगस्त, 2026 को आई इस आपदा में अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 384 लोग लापता हैं, जिनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इस जलप्रलय ने रसुवागढ़ी स्थित फ्रेंडशिप ब्रिज और अरनिको हाईवे के बड़े हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया है, जो चीन और नेपाल के बीच व्यापार का एक मुख्य जरिया है।
एनर्जी सेक्टर पर बड़ा असर
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम 12 हाइड्रोज़पावर प्रोजेक्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ग्रिड से 430 MW बिजली कम होने से देश की कुल हाइड्रोज़पावर क्षमता पर सीधा असर पड़ा है। पहाड़ी इलाकों में मशीनरी और वितरण लाइनों की मरम्मत करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
शेयर बाजार का रिएक्शन
NEPSE का इंडेक्स 35.92 अंक नीचे लुढ़क कर बंद हुआ। सबसे ज्यादा दबाव हाइड्रोज़पावर कंपनियों पर देखने को मिला। Rasuwagadhi Hydropower, Sanjen Hydropower और Chilime Hydropower जैसे प्रमुख शेयरों में भारी बिकवाली हुई और कई शेयर लोअर सर्किट पर लॉक हो गए। निवेशक अब इन कंपनियों के रेवेन्यू लॉस और मरम्मत के लिए होने वाले अतिरिक्त खर्च को लेकर आशंकित हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम और संकेत
फिलहाल, इन कंपनियों के लिए बीमा कवर की अनिश्चितता और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में दोबारा निर्माण की भारी लागत निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। बाजार की नजर अब सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद और ग्रिड बहाली की समय-सीमा पर टिकी है।
