नेपाल ने विदेशी आपदा राहत पर लगी पाबंदी को हटा लिया है और अब अंतरराष्ट्रीय टीमें राहत कार्यों में जुटेंगी। भीषण बाढ़ के कारण Bhotekoshi और Trishuli क्षेत्रों में कई प्रमुख Hydropower प्रोजेक्ट्स को बड़ा नुकसान पहुंचा है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन पर असर पड़ने की आशंका है।
नेपाल सरकार ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों को राहत कार्यों में शामिल होने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला एक बड़ा नीतिगत बदलाव है, क्योंकि पहले अधिकारियों ने दावा किया था कि देश के पास पर्याप्त संसाधन हैं। बाढ़ से अब तक 579 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 2,000 लोग अभी भी लापता हैं।
एनर्जी सेक्टर पर मार
बिजनेस और इंफ्रास्ट्रक्चर के नजरिए से यह स्थिति ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) के लिए बेहद चिंताजनक है। Bhotekoshi और Trishuli नदियों के बेसिन में कई प्रमुख पावर प्लांट स्थित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 216 MW वाले Upper Trishuli-1 सहित कम से कम 14 बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। इन साइट्स पर कई कर्मचारियों के लापता होने से अंडरग्राउंड पावर हाउस और सुरंगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
एनर्जी सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए यह आपदा कई तरह के रिस्क लेकर आई है:
- कैपिटल लॉस: पावर प्लांट, सुरंगों और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के नष्ट होने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
- प्रोजेक्ट देरी: कई अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स की कमीशनिंग डेट्स आगे बढ़ सकती हैं।
- सप्लाई चैन: कई प्रोजेक्ट्स रीजनल पावर ग्रिड से जुड़े हैं, जिससे लॉन्ग-टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट्स प्रभावित हो सकते हैं।
ऑपरेशन्स में चुनौतियां
फिलहाल भूस्खलन (Landslides) के कारण रोड नेटवर्क पूरी तरह तबाह हो चुका है, जिससे भारी मशीनरी साइट्स तक पहुँचाना नामुमकिन सा हो गया है। इसके अलावा, नेपाल-चीन सीमा पर बनी 'बैरियर लेक्स' से नए बाढ़ के खतरे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन्स को बीच-बीच में रोकना पड़ रहा है।
अब बाजार की नजर इस बात पर है कि साइट्स से मलबा हटाने में कितना समय लगता है और इन एनर्जी एसेट्स को दोबारा चालू करने में कितना वक्त लगेगा। आने वाले महीनों में ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी की बहाली एनर्जी सप्लाई चैन को स्थिर करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी।
