दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद Navi Pillay को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान के लिए 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जहां वैश्विक संस्थाएं इस फैसले की सराहना कर रही हैं, वहीं इजरायल ने इसे राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित बताते हुए कड़ी निंदा की है।
नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने 85 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद Navi Pillay को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के साथ उन्हें 12 मिलियन स्वीडिश क्राउन की इनामी राशि भी दी जाएगी। यह सम्मान उनके अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखने, प्रणालीगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई और विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच में उनके जीवन भर के समर्पण को मान्यता देता है।
एक लंबा सफर
डरबन के एक भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं Pillay का करियर दशकों तक फैला हुआ है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court) में न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में भी कार्य किया है।
विवादों का साया
इस घोषणा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वागत किया गया है, लेकिन इजरायली सरकार ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजरायली अधिकारियों ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस चयन को एक 'राजनीतिक दांव' करार दिया है। उनका आरोप है कि नोबेल कमेटी का यह निर्णय उनके देश के प्रति पूर्वाग्रह को दर्शाता है। यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि सक्रिय संघर्ष क्षेत्रों में मानवाधिकार मानकों को लेकर दुनिया भर की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी संस्थाओं के बीच मतभेद कितने गहरे हैं।
भविष्य की चुनौतियां
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की जो स्थिति है, उसे देखते हुए यह पुरस्कार एक प्रतीकात्मक संदेश देने की कोशिश है। चूंकि Pillay अभी भी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में एक तदर्थ (ad hoc) न्यायाधीश के रूप में अपना कार्यकाल जारी रख रही हैं, इसलिए वैश्विक राजनीति पर इस फैसले का प्रभाव भविष्य के राजनयिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता के लिए एक अहम परीक्षा साबित होगा।
