श्रीलंका के सांसद Namal Rajapaksa एक बार फिर कानूनी घेरे में हैं। उन पर इंडियन-बैक्ड 'Krish Hotels' प्रोजेक्ट के लिए **7 करोड़ रुपये** (70 मिलियन रुपये) की रिश्वत लेने का आरोप लगा है, जो विदेशी निवेश की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
जेल में पूछताछ और नए आरोप
कोलंबो की रिमांड जेल में बंद विपक्षी नेता Namal Rajapaksa से 'कमीशन टू इन्वेस्टिगेट ब्रायबरी ऑर करप्शन' (Bribery Commission) ने शनिवार को कड़ी पूछताछ की। मामला 7 करोड़ श्रीलंकाई रुपये की कथित रिश्वत का है, जिसे कथित तौर पर Krish Hotels के स्थानीय प्रतिनिधि से लिया गया था। यह कंपनी भारत समर्थित एक बड़ा निवेश प्रोजेक्ट है।
बता दें कि 40 वर्षीय राजपक्षे पहले से ही सितंबर की शुरुआत से हिरासत में हैं। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और साल 2013 में SriLankan Airlines के लिए एयरबस विमानों की खरीद में अनियमितताओं के अलग-अलग मामले चल रहे हैं।
Krish Hotels विवाद की जड़ें
अधिकारियों ने होटल ग्रुप की चेयरपर्सन Janaki Siriwardena को भी 6 अक्टूबर तक रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि होटल प्रोजेक्ट को तेजी से मंजूरी दिलाने के लिए अवैध भुगतान किए गए थे। इस प्रोजेक्ट का विवादों से पुराना नाता रहा है; साल 2016 में भी इस पर फंड के दुरुपयोग के आरोप लगे थे।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है रिस्क?
यह मामला अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले इन्वेस्टर्स के लिए 'गवर्नेंस रिस्क' की एक बड़ी मिसाल है। जहां मौजूदा प्रशासन इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी 2024 की मुहिम बता रहा है, वहीं श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (SLPP) पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध (Political Victimisation) करार दे रही है। निवेशकों के लिए अब मॉनिटर करने वाली बात यह है कि इस जांच का असर भविष्य के भारत-श्रीलंका प्रोजेक्ट्स की अप्रूवल टाइमलाइन पर क्या पड़ेगा।
