NATO अधिकारियों ने यूरोप में रूसी खुफिया ऑपरेशंस में रिकॉर्ड उछाल की चेतावनी दी है। वहां अब तक **210** से ज्यादा साइबर हमले और तोड़फोड़ (sabotage) की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा बढ़ गया है।
बढ़ रहा है 'ग्रे ज़ोन' युद्ध का खतरा
NATO कमांडर्स ने यूरोप में रूसी ऑपरेशंस को लेकर गंभीर चिंता जताई है। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2025 में यह संख्या महज 59 थी, जो अब बढ़कर 210 के पार पहुंच गई है। इन घटनाओं में आगजनी, साइबर अटैक और ड्रोन फैक्ट्रियों व एयरपोर्ट्स के पास तोड़फोड़ की कोशिशें शामिल हैं, जो पूरे महाद्वीप की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।
बाजार और निवेशकों पर क्या असर?
इन्वेस्टर्स के लिए यह स्थिति अनिश्चितता पैदा कर रही है। यूरोप में एसेट रखने वाली कंपनियां अब अपनी सप्लाई चेन और डिजिटल नेटवर्क को सुरक्षित करने के लिए भारी निवेश कर रही हैं। लॉजिस्टिक्स, एनर्जी ट्रांसपोर्ट और टेलीकॉम सेक्टर में अब कंपनियों को सुरक्षा और कंप्लायंस पर अपना खर्च बढ़ाना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ सकता है।
सिक्योरिटी सेक्टर में बढ़ेगी डिमांड
बाजार के जानकारों का मानना है कि इन बढ़ते खतरों के बीच साइबर सिक्योरिटी और फिजिकल सिक्योरिटी प्रोवाइडर्स की डिमांड में इजाफा हो सकता है। कंपनियां अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए अब ज्यादा कैपिटल एलोकेशन कर रही हैं। हालांकि अभी यह पूरी तरह से युद्ध जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन इस तरह की 'ग्रे ज़ोन' हरकतें ग्लोबल एनर्जी प्राइस और ट्रांसपोर्ट रूट के इंश्योरेंस प्रीमियम को महंगा कर सकती हैं, जिससे लॉजिस्टिकल कॉस्ट में बढ़ोतरी की आशंका है।
