म्यांमार के राखाइन (Rakhine) राज्य में हुए भीषण हवाई हमले में **33** लोगों की जान चली गई है। इस हिंसा ने भारत के स्ट्रैटेजिक 'Kaladan Multi-Modal Transit Transport Project' के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ा दिए हैं, जो पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने की अहम कड़ी है।
हमले की भयावहता और मौजूदा स्थिति
28 सितंबर, 2026 को म्यांमार के राखाइन राज्य के 'क्योकटाव' (Kyauktaw) कस्बे के एक बाजार में यह दर्दनाक हवाई हमला हुआ। इसमें 33 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 36 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह क्षेत्र फिलहाल 'अराकन आर्मी' (Arakan Army) के कब्जे में है, जो म्यांमार के गृहयुद्ध का मुख्य केंद्र बन गया है।
भारत के लिए क्यों है यह चिंताजनक?
भारत के 'Act East Policy' का आधार स्तंभ 'Kaladan Multi-Modal Transit Transport Project' इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस प्रोजेक्ट का मकसद कोलकाता पोर्ट को म्यांमार के सित्वे (Sittwe) पोर्ट से जोड़ना और वहां से सड़क-नदी मार्ग के जरिए मिजोरम तक कनेक्टिविटी पहुंचाना है। मौजूदा लड़ाई ने प्रोजेक्ट के लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर की सुरक्षा और भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सैन्य रणनीति में बदलाव और बढ़ता जोखिम
2021 के तख्तापलट के बाद से ही म्यांमार में अस्थिरता चरम पर है। अब मिलिट्री फोर्सेज जमीनी लड़ाई के बजाय एयर पावर का इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि विरोधी गुटों की सप्लाई लाइन्स को तोड़ा जा सके। इस रणनीति ने इलाके में व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बेहद अस्थिर माहौल बना दिया है।
निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए सबसे बड़ा रिस्क प्रोजेक्ट में होने वाली देरी और सप्लाई चेन का बाधित होना है। जैसे-जैसे संघर्ष भारतीय सीमा के करीब पहुंच रहा है, बॉर्डर सिक्योरिटी के साथ-साथ शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की स्थिरता भी एक बड़ा मॉनिटरेबल फैक्टर बन गई है।
