Elon Musk इन दिनों दोहरे मोर्चे पर मुश्किलों में घिरे हैं। जहां अमेरिका में **$366 मिलियन** के चुनावी चंदे को लेकर वे बर्नी सैंडर्स के निशाने पर हैं, वहीं भारत में Starlink की एंट्री को लेकर सरकारी नियमों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
दुनिया के सबसे अमीर शख्स Elon Musk के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। अमेरिका में सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने 2026 के मिड टर्म चुनावों के लिए मस्क द्वारा किए गए $366 मिलियन के भारी-भरकम खर्च की तीखी आलोचना की है। सैंडर्स का आरोप है कि इतनी बड़ी धनराशि का निवेश सत्ता और धन के खतरनाक केंद्रीकरण को दर्शाता है।
भारत में रेगुलेटरी स्टैंड-ऑफ
राजनीतिक हलचल के बीच, मस्क को भारतीय बाजार में भी संघर्ष करना पड़ रहा है। मस्क ने आरोप लगाया था कि स्थानीय हित उनके स्टारलिंक (Starlink) वेंचर की एंट्री में बाधा डाल रहे हैं। हालांकि, भारत के संचार मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि सैटेलाइट सेवाओं के लिए नियम सभी कंपनियों के लिए एक समान हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं हो रहा है।
सुरक्षा मानकों पर सरकार का रुख
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, स्टारलिंक को अन्य ग्लोबल ऑपरेटर्स की तरह अनिवार्य सिक्योरिटी और टेक्निकल असेसमेंट से गुजरना होगा। स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट (Spectrum Allocation) से पहले डेटा सुरक्षा और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
सैटेलाइट इंटरनेट के इस उभरते हुए बाजार में लाइसेंस मिलने की गति और नियमों की स्पष्टता निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी तरह की देरी से सेवाओं के रोलआउट का समय प्रभावित हो सकता है, जिससे कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी बनाने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, बाजार की नजर इस बात पर है कि कब सिक्योरिटी असेसमेंट पूरे होते हैं और स्टारलिंक को भारत में आधिकारिक रूप से कामकाज शुरू करने की अनुमति मिलती है।
