प्रधानमंत्री Narendra Modi और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping की 12 सितंबर को BRICS समिट में मुलाकात हो सकती है। 2020 के बाद यह पहली बड़ी द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है, जो भारत-चीन के आर्थिक संबंधों और निवेश नियमों में बड़े बदलाव के संकेत दे सकती है।
12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में होने वाला 18वां BRICS लीडर्स समिट बेहद अहम माना जा रहा है। सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच औपचारिक बातचीत होगी। अगर यह बैठक होती है, तो 2020 के सीमा विवाद के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली बड़ी चर्चा होगी।
बाजार के लिए क्या हैं मायने?
दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद, साल 2025 में द्विपक्षीय व्यापार $155 बिलियन के स्तर पर रहा। यह आंकड़ा दिखाता है कि तमाम तनाव के बावजूद दोनों देश आर्थिक रूप से एक-दूसरे पर निर्भर हैं। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या यह समिट इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर एनर्जी जैसे सेक्टरों के लिए अधिक स्थिर व्यापारिक नीतियां लेकर आएगा।
बैलेंस की चुनौती
भारत ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर एनर्जी सेक्टर में विदेशी निवेश को लेकर नरम रुख अपनाया है, ताकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सके। यह बैठक साफ करेगी कि क्या भारत इस 'सिलेक्टिव ईजिंग' (selective easing) को आगे बढ़ाएगा या सुरक्षा के मद्देनजर और कड़े नियम लागू रहेंगे।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है। कूटनीतिक प्रगति धीमी होती है और ट्रेड इम्बैलेंस व सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयानों और कम्युनिक (communique) पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि यही तय करेंगे कि भारत-चीन के आर्थिक संबंधों में नरमी आएगी या पुरानी सावधानी बनी रहेगी।
