बिश्केक में आयोजित 26वें SCO समिट के दौरान PM Narendra Modi ने Russian राष्ट्रपति Vladimir Putin से यूक्रेन में जारी जंग को खत्म करने की अपील की है।
बिश्केक, किर्गिस्तान में 31 अगस्त, 2026 को 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान PM Narendra Modi और Russian राष्ट्रपति Vladimir Putin के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान भारतीय प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में जारी संघर्ष का मुद्दा उठाते हुए साफ कहा कि सैन्य कार्रवाई का रोजाना जारी रहना मानवीय प्रगति के लिए एक बड़ा झटका है और इस स्थिति का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकलना चाहिए।
भारत की कूटनीति और आर्थिक प्रभाव
यह बैठक भारत की फॉरेन पॉलिसी के लिहाज से एक निर्णायक मोड़ है। भारत जहां एक तरफ Moscow के साथ अपने रक्षा और आर्थिक रिश्तों को मजबूती दे रहा है, वहीं वैश्विक स्थिरता के लिए भी दबाव बना रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनावों के बावजूद दोनों देशों के बीच नागरिक और व्यापारिक संबंध मजबूत बने हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत और Russia के बीच टूरिज्म में 16% का इजाफा देखने को मिला है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
इन्वेस्टर्स और मार्केट ऑब्जर्वर्स के लिए ऐसी हाई-लेवल बैठकें बेहद मायने रखती हैं, क्योंकि इनसे सप्लाई चेन की स्थिरता और इंटरनेशनल ट्रेड का अंदाजा लगाया जाता है। भारत की रणनीति अपनी पारंपरिक सुरक्षा साझीदारियों को बनाए रखते हुए वैश्विक मानदंडों की वकालत करना है। ऊर्जा (Energy) और रक्षा (Defense) जैसे क्षेत्रों में भारत-रूस की साझेदारी का भविष्य सीधे तौर पर मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालातों पर टिका है।
भारतीय नेतृत्व का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों का हल युद्ध नहीं हो सकता। SCO जैसे बड़े मंच का उपयोग करके भारत की यह कोशिश मार्केट में स्थिरता लाने और कमोडिटी की कीमतों को अनुमानित रखने के लिए है। आने वाले समय में दुनिया भर के निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या कूटनीति के ये प्रयास अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कोई बड़ा बदलाव ला पाते हैं या नहीं।
