मिडिल ईस्ट में बढ़ता जियो-पॉलिटिकल तनाव अब स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में शिपिंग को प्रभावित कर रहा है। इससे टैंकर लागत आसमान छू रही है, जो भारतीय बाजार और क्रूड ऑयल की कीमतों के लिए बड़ा रिस्क बन सकता है।
शिपिंग रूट्स पर संकट का साया
मिडिल ईस्ट में गहराते तनाव ने वैश्विक शिपिंग रूट्स में बड़ी हलचल मचा दी है। खास तौर पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया की तेल और गैस सप्लाई का मुख्य रास्ता है, वहां ट्रैफिक काफी कम हो गया है। हालात इतने नाजुक हैं कि शिपिंग कंपनियों को जोखिम वाले रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे टैंकर रेट्स बढ़कर $6,50,000 प्रति दिन तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा, ट्रांजिट रिस्क और बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) में भारी उछाल से एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बढ़ गई है।
बैन का असर और अमेरिकी कदम
क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच, अमेरिकी खजाने (US Treasury) ने ईरान से जुड़े वित्तीय संस्थानों पर शिकंजा कसा है। हाल ही में, अमेरिका ने 'Banque Misr' की UAE शाखाओं की अमेरिकी वित्तीय सिस्टम तक पहुंच को रोकने का प्रस्ताव रखा है। आरोप है कि इस बैंक ने $1.8 बिलियन की ट्रांजेक्शन ईरान के शैडो बैंकिंग नेटवर्क के जरिए की है। हालांकि, 'सेंट्रल बैंक ऑफ इजिप्ट' ने साफ किया है कि ये प्रतिबंध सिर्फ UAE ऑपरेशंस तक सीमित हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए चिंता
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर बहुत अधिक निर्भर है। अगर होर्मुज में यह तनाव लंबा खिंचा, तो ग्लोबल ऑयल प्राइसेज में उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर भारत के फ्यूल इंपोर्ट बिल, करेंट अकाउंट डेफिसिट और घरेलू महंगाई (Inflation) पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, रूस और ईरान के बीच अजरबैजान के रास्ते नेचुरल गैस सप्लाई के लिए बातचीत चल रही है। हालांकि, यह प्रोजेक्ट लंबे समय की बात है क्योंकि इसमें भारी-भरकम पूंजी निवेश और अंतरराष्ट्रीय जटिलताएं शामिल हैं। फिलहाल, निवेशकों को ग्लोबल ऑयल प्राइसेज और समुद्री बीमा ट्रेंड्स पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
