मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब के लिए उड़ानें **31 अक्टूबर, 2026** तक सस्पेंड कर दी गई हैं। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी नौसेना की तैनाती से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर संकट के बादल गहरा गए हैं, जिससे भारतीय एविएशन और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ गया है।
एविएशन सेक्टर पर संकट
क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा असर भारतीय ट्रैवल ऑपरेटर्स और एयरलाइंस पर पड़ रहा है। रियाद में मिसाइल हमले के बाद सुरक्षा कारणों से सऊदी अरब के लिए सभी कमर्शियल उड़ानें कम से कम 31 अक्टूबर, 2026 तक रद्द कर दी गई हैं। भारत सरकार ने भी नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इस अनिश्चितता के दौर में InterGlobe Aviation (IndiGo) और Air India जैसी एयरलाइंस को रेवेन्यू और ऑपरेशनल दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
एनर्जी मार्केट और होर्मुज का रिस्क
ग्लोबल मार्केट के लिए सबसे बड़ा खतरा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जहां से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 20% हिस्सा गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खतरा बढ़ा दिया है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछाल आना तय है।
भारतीय बाजार पर असर
भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए भारी आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय इकोनॉमी के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, पेंट्स और स्पेशियलिटी केमिकल्स जैसी कंपनियां, जो ऑयल डेरिवेटिव्स पर निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर भी असर पड़ सकता है। निवेशकों को फिलहाल क्रूड ऑयल ट्रेंड्स और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा स्थिति पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
