ग्लोबल मार्केट्स में तूफानी तेजी, ईरान पर टेंशन कम होने से ऑयल प्राइसेस धड़ाम!

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AuthorNeha Patil|Published at:
ग्लोबल मार्केट्स में तूफानी तेजी, ईरान पर टेंशन कम होने से ऑयल प्राइसेस धड़ाम!
Overview

आज ग्लोबल मार्केट्स में ज़बरदस्त तेजी देखने को मिली। खास तौर पर एशिया और अमेरिका के बाज़ारों में उछाल आया, जहाँ MSCI Asia Pacific Index **1.7%** चढ़ गया। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के ईरान मसले पर शांति के संकेत हैं। वहीं, क्रूड ऑयल (Crude Oil) के दाम भी **7%** तक गिर गए, जो पहले **$119.48** प्रति बैरल के स्तर पर थे।

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मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों ने ग्लोबल मार्केट्स को बड़ी राहत दी है, जिसके चलते आज एशियाई और अमेरिकी शेयर बाजारों में शानदार तेजी देखी गई। MSCI Asia Pacific Index 1.7% चढ़ गया, जबकि जापान, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया के बाज़ारों में भी इसी तरह का उछाल देखा गया। वॉल स्ट्रीट (Wall Street) पर भी बाज़ार हरे निशान में बंद हुए।

निवेशकों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन बयानों को सकारात्मक रूप से लिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सैन्य अभियान 'लगभग पूरे हो चुके हैं' और 'योजना से आगे चल रहे हैं'। इसे इस क्षेत्र में लड़ाई के जल्द खत्म होने का संकेत माना गया। इस उम्मीद के फौरन बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल की कीमतें अपने हालिया $119.48 प्रति बैरल के उच्चतम स्तर से करीब 7% तक गिर गईं। इसके अलावा, ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury yields) में पांच दिनों की बढ़ोतरी रुक गई और डॉलर भी कमजोर पड़ा।

सप्लाई चेन की चिंताएं अभी भी बरकरार

जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical tensions) में आई इस कमी के बावजूद, एनर्जी सप्लाई (Energy supply) से जुड़ी अंदरूनी समस्याएं अभी भी एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), जिससे दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है, अभी भी खतरों से घिरा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी आधिकारिक बंदिश के बिना भी, सुरक्षा की चिंताएं और बीमा लागतों में वृद्धि के कारण व्यापार प्रभावी ढंग से बाधित हुआ है। इससे टैंकरों की आवाजाही कम हुई है और इस क्षेत्र में शिपिंग लागत बढ़ गई है।

पर्शियन गल्फ (Persian Gulf) के बड़े तेल उत्पादक देशों, जैसे इराक और कुवैत, ने स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इराक ने अपने उत्पादन में लगभग 15 लाख बैरल प्रति दिन की कटौती की है, जबकि कुवैत ने 3 लाख बैरल प्रति दिन की कटौती की है। भू-राजनीतिक खबरों से हटकर, ये वास्तविक सप्लाई चेन (Supply chain) की दिक्कतें तेल की कीमतों पर लगातार ऊपर की ओर दबाव बना रही हैं।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर चिंताएं और आगे का रास्ता

बाज़ारों ने भले ही तनाव कम होने के संकेत का स्वागत किया हो, लेकिन वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global energy supply) में बुनियादी कमजोरी एक गंभीर जोखिम बनी हुई है। तेल की कीमतों में 'वॉर रिस्क प्रीमियम' (war risk premium) बढ़ रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर व्यवधान जारी रहे, तो क्रूड ऑयल की कीमतें $100 से $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं।

मार्केट का मूड अब कम मांग की चिंताओं से हटकर आपूर्ति की चिंताओं की ओर मुड़ गया है, जहाँ तेल को सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से ले जाना महत्वपूर्ण है। ग्रुप ऑफ सेवन (G7) के वित्त मंत्रियों ने कहा है कि वे स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व (strategic oil reserves) जारी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन फिलहाल कोई तत्काल कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे रिज़र्व केवल अल्पावधि की रुकावटों को ही पूरा कर सकते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना एक बड़ा खतरा है क्योंकि वैकल्पिक मार्ग बहुत कम हैं, जिससे यूरोप और एशिया विशेष रूप से कमजोर हो जाते हैं। यदि संघर्ष जारी रहता है या बिगड़ता है, तो खाड़ी में तेल और गैस सुविधाओं को नुकसान, साथ ही शिपिंग लागत में वृद्धि, व्यापक आपूर्ति समस्याएं और स्थायी मूल्य में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है, जिससे संभवतः इन्फ्लेशन (inflation) बढ़ सकती है।

इस स्थिति ने यह भी दिखाया है कि एशियाई अर्थव्यवस्थाएं एलएनजी (LNG) आपूर्ति में रुकावटों के प्रति कितनी संवेदनशील हैं, जिससे भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव के लिए स्थानीय स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

आगे क्या?

विश्लेषकों को उम्मीद है कि मध्य पूर्व में होने वाले घटनाक्रमों पर मार्केट्स की प्रतिक्रिया संवेदनशील बनी रहेगी। यदि तनाव तेज़ी से कम होता है, तो WTI क्रूड ऑयल की कीमतें वापस $94 के स्तर पर आ सकती हैं। हालांकि, यदि संघर्ष जारी रहता है और आपूर्ति तंग बनी रहती है, तो कीमतें बढ़ सकती हैं, कुछ अनुमान $123 प्रति बैरल के स्तर को छूने का लगा रहे हैं। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समूह स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (strategic petroleum reserves) को कितनी प्रभावी ढंग से जारी करते हैं, हालांकि ये रिज़र्व आम तौर पर केवल अल्पकालिक मुद्दों को ही कवर करते हैं। लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर रही है, खासकर यूरोप में, जहाँ यह पहले ही गिर चुका है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.