मणिपुर के हिल डिस्ट्रिक्ट्स में फिर से भड़की हिंसा में एक इलेक्ट्रिक लाइनमैन की जान चली गई है, जबकि तामेंगलोंग और कांगपोकपी जिलों में **24** घरों को आग के हवाले कर दिया गया है। मई **2023** से जारी अस्थिरता के बीच यह ताजा घटना सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनी है।
मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में हिंसा की ताजा घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। तामेंगलोंग जिले में 36 वर्षीय इलेक्ट्रिक लाइनमैन पओजंगम चोंगलोई की उस समय हत्या कर दी गई, जब वह 33 KV पावर लाइन की मेंटेनेंस का काम कर रहे थे। इस दुखद घटना के कुछ ही समय बाद, कांगपोकपी जिले के माकुई खुमान और माकुई थानाम्बा गांवों में लगभग 24 घरों को आग लगा दी गई।
हालाँकि, राहत की बात यह है कि ये गांव उस समय खाली थे, क्योंकि स्थानीय निवासी पुरानी हिंसा के कारण पहले ही यहां से पलायन कर चुके थे। लेकिन, यह घटना मई 2023 से चले आ रहे हिंसा के उस चक्र को दोहराती है, जिसने राज्य के आंतरिक हिस्सों की सुरक्षा और आर्थिक वातावरण को पूरी तरह से प्रभावित कर रखा है।
बिजनेस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
इस तरह की अस्थिरता का सीधा असर वहां काम कर रही कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर पड़ता है। बिजली विभाग के कर्मचारी की मौत यह दर्शाती है कि अशांत क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं का संचालन करना कितना जोखिम भरा है। ऐसी स्थितियों से:
- सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
- कंस्ट्रक्शन और यूटिलिटी फर्मों के लिए फील्ड ऑपरेशंस चलाना मुश्किल हो जाता है।
- लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाली कंपनियां अपनी सुरक्षा और 'ऑपरेशनल फिजिबिलिटी' को लेकर सतर्क हो जाती हैं।
फिलहाल स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू कर दिया है, लेकिन कम्युनिटी लीडर्स ने दूर-दराज के इलाकों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। निवेशक और स्टेकहोल्डर्स अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि सरकार इस अशांति को रोकने के लिए क्या कड़े सुरक्षा कदम उठाती है, क्योंकि क्षेत्रीय स्थिरता ही लंबे समय तक व्यापार की मजबूती का आधार है।
