फिलिस्तीनी राष्ट्रपति Mahmoud Abbas ने US वीजा न मिलने के बाद रामल्लाह से रिकॉर्डेड वीडियो के जरिए संयुक्त राष्ट्र (UN) को संबोधित किया। लगातार दूसरे साल उन्हें एंट्री नहीं मिली है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता का संकेत मिल रहा है और वैश्विक निवेशक इसे सप्लाई चेन और बाजार के सेंटीमेंट पर असर के तौर पर देख रहे हैं।
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति Mahmoud Abbas ने गुरुवार को अपने रामल्लाह कार्यालय से एक रिकॉर्डेड वीडियो के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। यह डिजिटल उपस्थिति इसलिए हुई क्योंकि अमेरिकी सरकार ने लगातार दूसरे वर्ष राष्ट्रपति अब्बास और उनके प्रतिनिधिमंडल को प्रवेश वीजा देने से इनकार कर दिया। यह घटना फिलिस्तीनी प्राधिकरण और पश्चिमी शक्तियों के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव को दर्शाती है।
अपने संदेश में, 2005 से फिलिस्तीनी प्राधिकरण का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रपति अब्बास ने इस दौर को फिलिस्तीनी इतिहास का सबसे खतरनाक समय बताया। उन्होंने वेस्ट बैंक में सैन्य कब्जे और गाजा में बुनियादी ढांचे को हुए भारी नुकसान की आलोचना की। वहीं, UN सत्र में इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की व्यक्तिगत उपस्थिति ने इस राजनयिक खाई को और गहरा कर दिया है।
फिलिस्तीनी प्राधिकरण के सामने अब कई आंतरिक चुनौतियां हैं। 2006 के बाद से वहां न तो कोई राष्ट्रपति चुनाव हुआ है और न ही विधायी चुनाव। आंतरिक भ्रष्टाचार की खबरों और इजरायली बस्तियों के विस्तार के कारण प्राधिकरण का प्रभाव काफी सीमित हो गया है। इसके अलावा, संस्था विदेशी सहायता पर अत्यधिक निर्भर है।
निवेशकों और ग्लोबल मार्केट के लिए ये घटनाक्रम मिडिल ईस्ट की व्यापक अस्थिरता को दर्शाते हैं। हालांकि यह राजनयिक प्रोटोकॉल का मामला लग सकता है, लेकिन वैश्विक मंच पर फिलिस्तीनी नेतृत्व की अनुपस्थिति लंबे समय तक स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण है। ऐसी भू-राजनीतिक अस्थिरता अक्सर सप्लाई चेन, कमोडिटी की कीमतों और बाजार के भरोसे को प्रभावित करती है। बाजार के जानकारों की नजर अब इस पर है कि क्या भविष्य में राजनयिक स्तर पर कोई सुधार होता है या अनिश्चितता का दौर जारी रहेगा।
