ग्लोबल इकोनॉमिक हेडविंड्स से निपटने की नई रणनीति
बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक्स (MDBs) स्थिरता और विकास को बनाए रखने के लिए अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक समूह (World Bank Group), और अफ्रीकी विकास बैंक समूह (African Development Bank Group) जैसी प्रमुख संस्थाएं जटिल आर्थिक परिस्थितियों से निपटने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। इनमें आपूर्ति श्रृंखला की समस्याएँ और ऊर्जा की ऊंची लागत जैसे मुद्दे शामिल हैं। उनकी रणनीति का मुख्य हिस्सा सदस्य देशों में वर्तमान दबावों को संभालने और दीर्घकालिक लचीलापन बनाने के लिए वित्तीय संसाधनों, विशेषज्ञता और साझेदारी को एकजुट करना है। ADB के प्रेसिडेंट और MDB हेड्स ग्रुप के वर्तमान चेयरमैन, मसाटो कंदा (Masato Kanda) ने कहा कि यह बढ़ा हुआ सहयोग बदलती वैश्विक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण है।
प्राइवेट कैपिटल को जुटाने पर नया फोकस
MDBs अब प्राइवेट फाइनेंस जुटाने पर ज़्यादा सक्रिय रूप से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसमें 'ओरिजिनेट-टू-डिस्ट्रीब्यूट/शेयर' (originate-to-distribute/share) जैसे मॉडलों के ज़रिए लेंडिंग कैपेसिटी (lending capacity) बढ़ाना शामिल है। ये मॉडल ऐसे निवेश के अवसर पैदा करते हैं जो इमर्जिंग मार्केट्स (emerging markets) में बड़े पैमाने पर प्राइवेट कैपिटल (private capital) को आकर्षित कर सकें। यह MDBs के लिए प्राइवेट सेक्टर ग्रोथ (private sector growth), रोज़गार सृजन (job creation) और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर (sustainable infrastructure) जैसे क्षेत्रों में बड़ा प्रभाव डालने के लिए महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) का लक्ष्य 2030 तक अपनी सालाना फाइनेंसिंग को दोगुना कर $17 अरब करना है, जिसमें ज़्यादातर प्राइवेट कैपिटल के लिए होगा। अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक (AfDB) की योजना 2033 तक प्राइवेट सेक्टर फाइनेंसिंग को तीन गुना करने की है।
रिस्क ट्रांसपेरेंसी में सुधार और लोकल लेंडिंग
MDBs की रणनीति का एक अहम हिस्सा इमर्जिंग मार्केट्स में वित्तीय जोखिमों को कम करना और ट्रांसपेरेंसी (transparency) में सुधार करना है। ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट्स (GEMs) कंसोर्टियम क्रेडिट रिस्क (credit risk) को स्पष्ट बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दशकों के डेटा से पता चलता है कि इन बाज़ारों में निवेश के जोखिम अक्सर सोचे गए जोखिमों से कम होते हैं। हाल के आंकड़े बताते हैं कि डिफ़ॉल्ट रेट्स (default rates) विकसित देशों की 'B' रेटेड कंपनियों के बराबर हैं, और रिकवरी रेट्स (recovery rates) वैश्विक औसत से ज़्यादा हैं। निवेश के जोखिमों को और कम करने और टिकाऊ विकास का समर्थन करने के लिए, MDBs लोकल करेंसी लेंडिंग (local currency lending) बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहे हैं। इसका उद्देश्य करेंसी रिस्क (currency risk) को कम करना और स्थानीय वित्तीय बाज़ारों को विकसित करना है, जिसे फॉरेन एक्सचेंज हेजिंग टूल्स (foreign exchange hedging tools) में सुधार पर हालिया चर्चाओं से भी समर्थन मिला है।
रोज़गार, पानी और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए नई पहलें
MDBs विकास पर प्रभाव को मापने और बढ़ाने के लिए नई पहलों की शुरुआत और उनमें सुधार भी कर रहे हैं। उन्होंने 'ज़्यादा और बेहतर रोज़गार' (more and better jobs) पैदा करने के संचालन को मापने के एक सामान्य तरीके पर सहमति व्यक्त की है। यह केवल नौकरियों की संख्या पर नहीं, बल्कि रोज़गार की गुणवत्ता, वेतन और शर्तों पर भी ध्यान केंद्रित करता है। यह इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (International Labour Organization) के 'डिसेंट वर्क' (decent work) दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसके अलावा, 'वाटर फॉरवर्ड' (Water Forward) पानी की प्रणालियों को आगे बढ़ाने के लिए एक नया वैश्विक प्रयास है। क्रिटिकल मिनरल्स (critical minerals) पर सहयोग भी बढ़ रहा है ताकि ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (digital transformation) के लिए महत्वपूर्ण, विविध और विश्वसनीय सप्लाई चेन्स (supply chains) का निर्माण किया जा सके।
प्राइवेट कैपिटल पर निर्भरता और क्रेडिट रिस्क की चिंताएं
MDBs द्वारा सक्रिय रूप से प्राइवेट कैपिटल की तलाश के बावजूद, इमर्जिंग मार्केट्स की इसे सोखने की क्षमता और उनकी साख (creditworthiness) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि GEMs डेटा कम जोखिम का सुझाव देता है, लेकिन भारी मात्रा में प्राइवेट फंड जुटाने का लक्ष्य पूरी तरह से साकार नहीं हो पाया है। प्राइवेट फाइनेंस पर निर्भरता उन देशों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है जिनके स्थानीय बाज़ार कमज़ोर हैं या जिनका कर्ज ज़्यादा है, खासकर अगर आर्थिक झटके वित्तीय स्थितियों को कस दें। हालांकि यह कुशल है, 'ओरिजिनेट-टू-डिस्ट्रीब्यूट' (originate-to-distribute) मॉडलों पर ध्यान केंद्रित करने से MDBs की सीधी निगरानी कम हो सकती है, जिससे उभरती क्रेडिट समस्याओं को छिपाया जा सकता है। इसके अलावा, जबकि MDBs प्रोक्योरमेंट (procurement) में वैल्यू-फॉर-मनी (value-for-money) में सुधार कर रहे हैं, इमर्जिंग इकोनॉमी की जटिल संरचनाएँ, जिनमें उच्च इनफॉर्मेलिटी (informality) और अलग-अलग डेटा क्षमताएं शामिल हैं, सटीक रोज़गार सृजन मेट्रिक्स (job creation metrics) के लिए चुनौतियां पेश करती हैं। लोकल करेंसी लेंडिंग, हालांकि मददगार है, इसमें जोखिम हैं। यदि पेड-इन कैपिटल (paid-in capital) के साथ ठीक से फंड नहीं किया जाता है, तो MDBs को करेंसी मिसमैच (currency mismatch) का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी टॉप क्रेडिट रेटिंग्स (credit ratings) और कुल बॉरोइंग कैपेसिटी (borrowing capacity) पर असर पड़ सकता है।
आउटलुक: सिस्टमिक रेज़िलिएंस का निर्माण
आगे देखते हुए, MDBs गुणवत्ता और मूल्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए, एक एकीकृत प्रणाली के रूप में अधिक प्रभावी ढंग से काम करने का लक्ष्य रखते हैं। उदाहरण के लिए, यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (EBRD) की 2030 तक कम से कम €150 अरब के ग्रीन इन्वेस्टमेंट (green investments) की योजना है, जिसमें आधे से ज़्यादा वार्षिक बिज़नेस ग्रीन प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित होगा। अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक की 10-साल की रणनीति प्राइवेट सेक्टर एंगेजमेंट को प्राथमिकता देती है और प्राइवेट फाइनेंसिंग को तीन गुना करने का लक्ष्य रखती है, जबकि AIIB का लक्ष्य 2030 तक सालाना $17 अरब है, जो बड़े पैमाने पर प्राइवेट कैपिटल पर केंद्रित है। ये प्रयास मिलकर सिस्टमिक रेज़िलिएंस (systemic resilience) बनाने, जलवायु परिवर्तन (climate change) से निपटने और चल रही वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद टिकाऊ विकास (sustainable growth) को बढ़ावा देने की एक रणनीतिक गति दिखाते हैं।