Lithuania Nuclear Ban: न्यूक्लियर हथियारों पर प्रतिबंध हटाने की तैयारी, ग्लोबल मार्केट पर बढ़ेगा टेंशन

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AuthorNeha Patil|Published at:
Lithuania Nuclear Ban: न्यूक्लियर हथियारों पर प्रतिबंध हटाने की तैयारी, ग्लोबल मार्केट पर बढ़ेगा टेंशन

Lithuania की संसद ने परमाणु हथियारों और विदेशी सैन्य अड्डों पर लगे संवैधानिक प्रतिबंध को हटाने के लिए पहली वोटिंग पूरी कर ली है। हालांकि अंतिम फैसला जनवरी 2027 में होगा, लेकिन इस कदम ने मॉस्को की चिंताएं बढ़ा दी हैं और बाल्टिक क्षेत्र में जियो-पॉलिटिकल तनाव को हवा दी है, जिसका असर ग्लोबल मार्केट और एनर्जी प्राइसेज पर पड़ सकता है।

संविधान संशोधन की पहली बड़ी जीत

Lithuania की संसद ने रक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को हुई वोटिंग में 106 सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य 30 साल पुराने उस प्रतिबंध को हटाना है, जो देश में परमाणु हथियारों और विदेशी मिलिट्री बेस की तैनाती को रोकता था। इस कदम का मकसद NATO और European Union के अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करना है।

फाइनल फैसला अभी बाकी

हालांकि यह पहली जीत है, लेकिन प्रक्रिया अभी लंबी है। संसद को 12 जनवरी 2027 को दूसरी और अंतिम वोटिंग करनी होगी। इस बदलाव को पूरी तरह लागू करने के लिए संसद की 141 सीटों में से कम से कम 94 वोटों (दो-तिहाई बहुमत) की जरूरत होगी। फिलहाल सरकार का कहना है कि यह कदम तुरंत किसी हथियारों की तैनाती के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए कानूनी लचीलापन लाने के लिए है।

मॉस्को की नाराजगी और मार्केट पर असर

इस फैसले के बाद Kremlin के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने इसे गंभीर तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि रूस की सीमा के करीब NATO के इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती है।

निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यूरोप में जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता सीधे तौर पर ग्लोबल मार्केट के सेंटीमेंट को प्रभावित करती है। तनाव बढ़ने से कमोडिटी और एनर्जी प्राइसेज में उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ सकता है। जब ग्लोबल स्तर पर रिस्क बढ़ता है, तो विदेशी निवेशक अक्सर सुरक्षित एसेट्स की ओर भागते हैं, जिसका असर FII के जरिए भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स पर भी पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि हालांकि भारतीय इक्विटी पर इसका असर अप्रत्यक्ष है, लेकिन यूरोप की सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव ग्लोबल सप्लाई चेन और निवेशकों के मूड को बदल सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.