Leh Apex Body ने गृह मंत्रालय को 9 सितंबर, 2026 की बैठक से पहले कड़ा अल्टीमेटम दिया है। लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे इन समूहों ने बातचीत विफल होने पर बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी है। वार्ता के लिए रास्ता साफ करने के उद्देश्य से फिलहाल क्षेत्रीय पदयात्रा को टाल दिया गया है।
मांगों पर अड़े संगठन
Leh Apex Body (LAB) और Kargil Democratic Alliance (KDA) ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 9 सितंबर, 2026 को गृह मंत्रालय के साथ होने वाली सब-कमेटी की बैठक में ठोस नतीजे नहीं निकलते हैं, तो लद्दाख में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाएंगे। यह बातचीत लद्दाख यूनियन टेरिटरी के भविष्य के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
प्रमुख मांगों में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत संवैधानिक सुरक्षा और लद्दाख लोक सेवा आयोग (Ladakh Public Service Commission) का गठन शामिल है। इसके साथ ही, समूह 2019 से चल रही प्रशासनिक स्थिति को बदलकर अधिक विधायी स्वायत्तता और संसदीय प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं।
पिछले जख्म और बढ़ता तनाव
तनाव का एक बड़ा कारण 24 सितंबर, 2025 की हिंसा है, जिसकी जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जैसे नेताओं ने कानूनी प्रक्रिया में देरी और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को केंद्र के साथ विश्वास बनाने में बड़ी बाधा बताया है। इस सितंबर के महीने को आंदोलनकारी 'शहीद दिवस माह' के रूप में मना रहे हैं, जिससे बातचीत का राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है।
आर्थिक और कारोबारी असर
लद्दाख की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर है। किसी भी तरह का बड़े स्तर का विरोध प्रदर्शन क्षेत्र में बिजनेस एक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, 'कारगिल-लेह शांति और न्याय पदयात्रा' को स्थगित करना यह दिखाता है कि संगठन अभी भी कूटनीतिक रास्तों को खुला रखना चाहते हैं। अब सभी की निगाहें 9 सितंबर को सरकार द्वारा दिए जाने वाले संकेतों पर टिकी हैं।
