लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने शनिवार को Nabatiyeh क्षेत्र का दौरा किया। हाल ही में Ali al-Taher रिज के पास हुई झड़पों के बाद, रोम में होने वाली बातचीत अक्टूबर तक टल गई है, जिससे **20 जून** को हुए सीजफायर (Ceasefire) पर खतरा मंडरा रहा है।
लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को अचानक दक्षिणी शहर Nabatiyeh का दौरा किया। यह दौरा हाल ही में Ali al-Taher रिज के पास बढ़ी सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें अंडरग्राउंड फोर्टिफिकेशन को नष्ट किया गया है। यह घटनाक्रम 20 जून 2026 को हुए उस अमेरिकी मध्यस्थता वाले सीजफायर की कमजोरी को दर्शाता है, जो अब टूटता हुआ नजर आ रहा है।\n\nफिलहाल लेबनानी और इजरायली अधिकारियों के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है और रोम में होने वाली राजनयिक चर्चाओं को भी अक्टूबर 2026 तक टाल दिया गया है। राष्ट्रपति Aoun ने स्पष्ट किया है कि विदेशी सेना की वापसी और विस्थापित नागरिकों की घर वापसी उनकी सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?\n\nमिडल ईस्ट में जारी यह अस्थिरता ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक इंडिकेटर की तरह है। इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव सीधे तौर पर क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा करता है। चूंकि भारत तेल का बड़ा आयातक (Importer) है, इसलिए वहां की अशांति का सीधा असर भारत के महंगाई दर और इंपोर्ट बिल पर पड़ता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में एनर्जी सेक्टर से जुड़े शेयरों पर इस जियो-पॉलिटिकल तनाव का असर पड़ सकता है।\n\nक्षेत्र में 10 लाख से ज्यादा लोगों का विस्थापन और बुनियादी ढांचे को हुआ नुकसान आर्थिक रिकवरी को और कठिन बना रहा है। अब सबकी नजरें अक्टूबर में होने वाली कूटनीतिक बैठकों पर टिकी हैं।
