रूस के ताबड़तोड़ ड्रोन हमलों ने कीव के ट्रांजिट इंफ्रास्ट्रक्चर को बुरी तरह तबाह कर दिया है। नीपर नदी पर बने पुलों के क्षतिग्रस्त होने से लॉजिस्टिक्स ठप हो गए हैं। इस बीच, यूक्रेन अब ऊर्जा ग्रिड और ब्लैक सी शिपिंग को बचाने के लिए सीमित सीजफायर की कोशिश कर रहा है, जिसमें भारत एक प्रमुख मध्यस्थ के तौर पर उभर रहा है।
बुनियादी ढांचे पर गहरा प्रहार
रूस ने 100 से ज्यादा ड्रोन, जिनमें आधुनिक जेट-पावर्ड मॉडल भी शामिल हैं, की मदद से कीव पर जोरदार हमला किया है। इसका सीधा असर राजधानी के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर पड़ा है, जहाँ नीपर नदी पर बने 3 प्रमुख पुलों को बंद करना पड़ा है। यह हमला युद्ध की रणनीति में एक बड़ा बदलाव दिखाता है।
कूटनीतिक पहल और भारत की भूमिका
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने पुष्टि की है कि कीव अब सीजफायर के प्रस्तावों पर काम कर रहा है। इस शांति पहल का मुख्य मकसद यूक्रेन की पावर ग्रिड और ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। समझौते के तहत रूस को ऊर्जा संयंत्रों पर हमले रोकने होंगे, बदले में यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों पर अपने ड्रोन हमले बंद करेगा।
इस संकट को सुलझाने के लिए भारत अब एक संभावित मध्यस्थ के तौर पर सामने आया है। भारत के अलावा अमेरिका, तुर्की और मिस्र भी इन चर्चाओं का हिस्सा हैं। हालांकि, मास्को ने फिलहाल 'सीमित सीजफायर' को ठुकराते हुए पूरी शांति डील की मांग पर जोर दिया है।
ग्लोबल मार्केट और निवेशकों पर असर
निवेशकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। यूक्रेन पहले ही $27 बिलियन के बजट घाटे का सामना कर रहा है। बुनियादी ढांचे की तबाही और शांति वार्ता की अनिश्चितता ने कमोडिटी बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। जैसे-जैसे सर्दियां नजदीक आ रही हैं, ऊर्जा गलियारों में कोई भी और रुकावट ग्लोबल लेवल पर कीमतों में बड़ा उछाल ला सकती है।
