रूस ने यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskiy के **60 दिन** के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। मॉस्को का कहना है कि उसे छोटे ब्रेक नहीं, बल्कि पूर्ण शांति समझौता चाहिए। इस कूटनीतिक गतिरोध से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
रूस के क्रेमलिन ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट कर दिया है कि वह यूक्रेन के साथ किसी भी प्रकार के 'टैक्टिकल पॉज' या अस्थायी संघर्ष विराम के पक्ष में नहीं है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskiy ने चुनाव कराने के लिए 60 दिनों के युद्धविराम का सुझाव दिया था, जिसे मॉस्को ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। रूस का जोर किसी छोटे ब्रेक के बजाय एक व्यापक और लॉन्ग-टर्म पीस एग्रीमेंट पर है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
यह कूटनीतिक गतिरोध सीधे तौर पर ग्लोबल मार्केट के लिए रिस्क फैक्टर है। पूर्वी यूरोप में जारी तनाव का सीधा असर क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस अनिश्चितता के कारण एनर्जी और एग्रीकल्चर सेक्टर के कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रह सकता है।
कूटनीतिक और राजनीतिक पहलू
यह प्रस्ताव ऐसे समय पर सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी दबाव बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी कीव में नए नेतृत्व के जनादेश पर अपनी बात रखी थी। फिलहाल, यूक्रेन के संविधान के तहत मार्शल लॉ के दौरान चुनाव नहीं कराए जा सकते, जिसे बदलने की कोशिश में यह 60 दिन की समय सीमा मांगी गई थी। लेकिन मॉस्को का रुख साफ है कि उन्हें यह बातचीत का आधार स्वीकार्य नहीं है।
आने वाले हफ्तों में वैश्विक शक्तियों के रुख पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि संघर्ष की तीव्रता बढ़ती है, तो इसका असर शिपिंग रूट और ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों को कड़ी नजर रखनी चाहिए।
