North Korea ने अंतरराष्ट्रीय दबाव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। किम यो जोंग ने परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को बेमानी करार देते हुए इसे 'शोर' बताया है। 17 सितंबर, 2026 को जारी इस बयान ने साफ कर दिया है कि देश का परमाणु दर्जा अब अपरिवर्तनीय है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
North Korea ने परमाणु हथियारों को लेकर अपना सख्त रुख और कड़ा कर लिया है। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की बहन, किम यो जोंग ने 17 सितंबर, 2026 को जारी एक बयान में परमाणु निरस्त्रीकरण (denuclearization) की अंतरराष्ट्रीय मांगों को सिरे से खारिज कर दिया। यह बयान स्टेट-रन Korean Central News Agency (KCNA) के जरिए जारी किया गया।
क्यों भड़कीं किम यो जोंग?
यह तीखी प्रतिक्रिया वियना में आयोजित 70वें International Atomic Energy Agency (IAEA) जनरल कॉन्फ्रेंस के दौरान सदस्य देशों द्वारा प्योंगयांग पर परमाणु प्रोग्राम बंद करने के दबाव के जवाब में आई है। किम यो जोंग ने इन वैश्विक अपीलों को 'जाना-पहचाना बेतुका तर्क' और 'बकवास' करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि North Korea का परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र होना अब कानूनी और व्यावहारिक रूप से तय हो चुका है।
मार्केट पर असर
खुफिया अनुमानों के मुताबिक, North Korea के पास 57 से 120 परमाणु हथियार हो सकते हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। ग्लोबल मार्केट के जानकारों के लिए यह चिंता का विषय है। कोरियाई प्रायद्वीप (Korean Peninsula) पर बढ़ता तनाव अक्सर मार्केट में 'Risk-off' सेंटिमेंट पैदा करता है, क्योंकि निवेशक अनिश्चित माहौल के बजाय स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं।
2019 के हनोई समिट की असफलता के बाद से ही कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। अब जब North Korea ने अपने परमाणु हथियारों को एक 'अपरिवर्तनीय ढाल' (irreversible deterrent) के रूप में पेश किया है, तो भविष्य में निरस्त्रीकरण की बातचीत की उम्मीद बेहद कम हो गई है। अब पूरी दुनिया की नजरें United Nations और अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया (South Korea) की आगामी प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।
