कानपुर के एक इंजीनियर, जो नोएडा स्थित एक फर्म के लिए काम करते हैं, को मॉस्को में हिरासत में लिया गया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें जबरन रूसी सेना में भर्ती करने का दबाव बनाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
कानपुर के रहने वाले चंदन गुप्ता, जो एक नोएडा बेस्ड इंजीनियरिंग फर्म के लिए रूस में तैनात थे, को रविवार, 6 सितंबर 2026 को मॉस्को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उनकी पत्नी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि स्थानीय अधिकारी उन्हें रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहे हैं। यह घटना न केवल चंदन गुप्ता के परिवार के लिए चिंता का विषय है, बल्कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में विदेशी नागरिकों की अनैच्छिक भर्ती के बढ़ते मामलों को भी उजागर करती है।
कंपनियों के लिए क्या है खतरा?
यह मामला उन भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है जो हाई-रिस्क वाले भौगोलिक क्षेत्रों में अपने प्रोजेक्ट्स चला रही हैं। जब किसी देश की कानून व्यवस्था या राजनयिक स्थिरता संदिग्ध होती है, तो वहां काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ-साथ कंपनियों पर भी कई तरह के दबाव आते हैं:
- ऑपरेशनल डिसरप्शन: कर्मचारियों की असुरक्षा से प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है।
- कंप्लायंस कॉस्ट: डिप्लोमैटिक दबाव और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण कंपनियों का खर्च बढ़ता है।
- रेपुटेशनल रिस्क: कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित न कर पाने का असर कंपनी की साख पर पड़ता है।
डिप्लोमैटिक स्तर पर क्या है स्थिति?
भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने साल 2025 के अंत तक ऐसे 139 नागरिकों को सुरक्षित वतन वापसी में मदद की थी, जिन्हें इसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में, मॉस्को में भारतीय दूतावास या रूसी अधिकारियों की ओर से हिरासत को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। परिवार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप की अपील की है ताकि चंदन गुप्ता की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की जा सके।
निवेशकों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार का कूटनीतिक रुख क्या रहता है, क्योंकि इसी के आधार पर भारतीय कंपनियों के लिए भविष्य में ऐसे देशों में काम करना 'वायबल' (Viable) रहेगा या नहीं।
