Kamala Harris ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में उतरने के संकेत दिए हैं। वे भारतीय-अमेरिकी वोटर्स को लुभाने के लिए H-1B वीजा फीस में प्रस्तावित बढ़ोतरी का विरोध कर रही हैं, जो भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा रिस्क हो सकता है।
पूर्व उपराष्ट्रपति Kamala Harris ने 2028 में व्हाइट हाउस की दौड़ में शामिल होने के संकेत दिए हैं। उनकी टीम, जिसका नेतृत्व ओपल वधान कर रही हैं, इस समय भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर काम कर रही है।
वीजा फीस का बड़ा मुद्दा
कैंपेन का सबसे बड़ा फोकस महंगाई और बुनियादी खर्चों के साथ-साथ इमिग्रेशन रिफॉर्म्स पर है। खास बात यह है कि विपक्षी गुटों ने H-1B वीजा फीस को बढ़ाकर $100,000 तक करने की चर्चा की है। अगर यह प्रस्ताव हकीकत बनता है, तो दुनिया भर की दिग्गज टेक कंपनियों का ऑपरेशनल ढांचा पूरी तरह बदल सकता है।
भारतीय IT सेक्टर पर असर
भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने वाली है। भारतीय IT कंपनियां बड़े पैमाने पर H-1B वीजा के जरिए अपने ऑपरेशंस चलाती हैं। यदि वीजा फीस में इतना बड़ा उछाल आता है, तो इन कंपनियों की ऑपरेटिंग मार्जिन पर भारी दबाव पड़ेगा। कंपनियों को अपनी सर्विस डिलीवरी मॉडल बदलने पड़ेंगे या अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्ती का खर्च बढ़ाना पड़ेगा, जिससे उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है।
चुनाव की चुनौतियां
2028 की रेस अभी शुरुआती दौर में है। Kamala Harris के सामने डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर ही Gavin Newsom जैसे दिग्गजों से चुनौती मिल सकती है। साथ ही, अमेरिका में बढ़ती महंगाई और कॉस्ट-ऑफ-लिविंग का मुद्दा न केवल मिडटर्म चुनावों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि भविष्य के उम्मीदवारों की लोकप्रियता पर भी असर डालेगा। निवेशकों को सलाह है कि वे अमेरिकी वीजा पॉलिसी से जुड़ी हर लेजिस्लेटिव अपडेट पर पैनी नजर रखें, क्योंकि यह भारतीय IT सेक्टर की लंबी अवधि की प्रॉफिटेबिलिटी का अहम पैमाना है।
