जॉर्डन और अमेरिका के मिलिट्री गठबंधन तथा ईरानी समर्थित हमलों के चलते इलाके में तनाव बढ़ गया है। इसका सीधा असर Welspun Corp जैसी भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है, जिन्होंने हाल ही में वहां पाइप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का प्लान बनाया है।
जॉर्डन ने अमेरिका के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत बनाए रखा है, लेकिन वहां लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों ने मिडल ईस्ट के हालात को तनावपूर्ण बना दिया है। जॉर्डन अमेरिकी सेना के लिए एक लॉजिस्टिक हब है, जिसके चलते वहां काम करने वाली कंपनियों के लिए रिस्क और अनिश्चितता का स्तर बढ़ गया है।\n\n### भारतीय कंपनियों के लिए क्या है रिस्क?\n\nइसका सीधा संबंध भारतीय शेयर बाजार से है। 1 सितंबर 2026 को Welspun Corp Limited ने जॉर्डन में पाइप मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी शुरू करने के लिए एक MoU साइन किया था। हालांकि विदेशी बाजार में विस्तार एक ग्रोथ का मौका है, लेकिन युद्ध जैसे हालात में ऑपरेशनल निरंतरता, स्टाफ की सुरक्षा और प्रोजेक्ट में देरी एक बड़ी चुनौती बन जाती है।\n\n### लागत पर असर और चुनौतियां\n\nतनाव के माहौल में कंपनियों के लिए सप्लाई चेन और एसेट की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता होती है। इसका असर बैलेंस शीट पर भी दिखता है:\n\n* एसेट इंश्योरेंस: सुरक्षा के खतरों के कारण इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ सकते हैं।\n* ऑपरेशनल कॉस्ट: फैसिलिटी की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।\n* लॉजिस्टिक्स: इलाके में तनाव बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन में रुकावटें आ सकती हैं।\n* एनर्जी प्राइसेज: ब्रेंट क्रूड ऑयल का $95 प्रति बैरल के करीब पहुंचना मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए महंगा साबित हो रहा है।\n\nनिवेशकों को अब Welspun Corp के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे इन जियो-पॉलिटिकल रिस्क को कैसे मिटिगेट करेंगे। प्रोजेक्ट की समय-सीमा और साइट की सुरक्षा से जुड़ी हर छोटी अपडेट पर बाजार की निगाहें टिकी रहेंगी।
