जम्मू और कश्मीर में भारी बारिश और भूस्खलन ने तबाही मचाई है। अब तक **27** लोगों की जान जा चुकी है और बिजली, संचार और परिवहन जैसे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को भी फिलहाल रोक दिया है, जबकि बचाव कार्य जारी है।
Detailed Coverage
जम्मू-कश्मीर में विनाशकारी बाढ़
जम्मू और कश्मीर भारी बारिश की चपेट में है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। 21 जुलाई 2026 तक मिले आंकड़ों के अनुसार, इन प्राकृतिक आपदाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। सबसे ताजा घटना 20 जुलाई को पुंछ जिले के लोरान डुमिल्लन गांव में हुई, जहाँ भूस्खलन की चपेट में आने से एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौत हो गई। राजौरी और डोडा जिलों से भी मौतों की पुष्टि हुई है।
सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
इस तबाही ने खासकर पुंछ और राजौरी जिलों में महत्वपूर्ण सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। राजौरी शहर में अचानक आई बाढ़ ने लगभग 30 वाहन बहा दिए और डारहली नदी के किनारे बने व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों को भारी नुकसान पहुँचाया। संचार व्यवस्था, जिसमें मोबाइल टावर और ऑप्टिकल फाइबर लाइनें शामिल हैं, बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे कई ग्रामीण इलाके कट गए हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण बिजली का बुनियादी ढांचा भी क्षतिग्रस्त हुआ है, जिससे व्यापक बिजली कटौती हो रही है।
परिवहन की स्थिति भी गंभीर है। डोडा जिले में जम्मू-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़े बोल्डर गिरने से मौतें भी हुई हैं और यात्रा में देरी हो रही है। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए, अधिकारियों ने आपातकालीन निकासी अभियान चलाए हैं। जैसे-जैसे चिनाब नदी का जलस्तर बढ़ा, रामबन में अब्दुल्ला और तारिक पुलों के पास झुग्गी बस्तियों से 50 से अधिक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
आर्थिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
महत्वपूर्ण वार्षिक तीर्थयात्रा, अमरनाथ यात्रा को पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से आधिकारिक तौर पर निलंबित कर दिया गया है। तीर्थयात्रियों को तब तक निकटतम सुरक्षा शिविरों में रहने का निर्देश दिया गया है जब तक कि स्थिति सामान्य न हो जाए। राहत कार्यों में फिलहाल प्रभावित आबादी को आवश्यक खाद्य आपूर्ति पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हालांकि कुछ इलाकों में पानी का स्तर कम होने लगा है, लेकिन मौसम विभाग ने 25 जुलाई 2026 तक लगातार बारिश और बादल फटने की चेतावनी दी है, जिससे बहाली के प्रयासों में और बाधा आ सकती है।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले निवेशक और हितधारक संभवतः बिजली और संचार नेटवर्क की बहाली की समय-सीमा पर नजर रखेंगे। साथ ही, क्षतिग्रस्त खेतों और बुनियादी ढांचे का स्थानीय आर्थिक गतिविधि पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी ध्यान दिया जाएगा। आगे की जानकारी मानसून के बाकी मौसम की तीव्रता और आवश्यक सरकारी सेवाओं द्वारा क्षतिग्रस्त परिवहन और उपयोगिता गलियारों की मरम्मत की गति पर निर्भर करेगी।
