विदेश मंत्री एस जयशंकर तीन दिवसीय UAE दौरे पर हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना है, जिसमें खास फोकस 'Comprehensive Economic Partnership Agreement' (CEPA) और स्थानीय करेंसी में व्यापार पर रहेगा।
आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की तैयारी
भारत और UAE के बीच चल रही आर्थिक साझेदारी का मुख्य आधार CEPA है, जो व्यापार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस दौरे के दौरान दोनों देश नॉन-ऑयल ट्रेड को और बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि इस समझौते की प्रगति सीधे तौर पर जेम्स एंड ज्वैलरी, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर असर डालेगी।
लोकल करेंसी और इन्वेस्टमेंट पर जोर
दोनों देशों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए रुपी-दिरहम में व्यापार को बढ़ावा दिया है, जिससे ट्रांजेक्शन कॉस्ट कम हो रही है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि इसे और कितनी गति दी जाएगी। वहीं, Abu Dhabi Investment Authority (ADIA) और Mubadala जैसे सॉवरेन वेल्थ फंड्स पहले से ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़ा निवेश कर रहे हैं। इस दौरे में भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगने की उम्मीद है।
जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिकल स्थिति पर भी नजर रखनी चाहिए। एनर्जी सप्लाई चेन और शिपिंग रूट्स में किसी भी तरह की हलचल का असर क्रूड ऑयल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। Raisina Middle East फोरम में जयशंकर का संबोधन इस बात के संकेत देगा कि भारत इन क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना कैसे करने वाला है। निवेशकों को आने वाले दिनों में नए इन्वेस्टमेंट मेमोरेंडम और ट्रेड कोटा से जुड़े अपडेट्स पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
