विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने ग्लोबल सप्लाई चेन के हथियारीकरण को लेकर आगाह किया है, जिसका सीधा असर भारत के एनर्जी, फूड और फर्टिलाइजर इंपोर्ट बिल पर पड़ सकता है।
समुद्री व्यापार पर बढ़ता संकट
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने गल्फ, रेड सी और ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों पर बढ़ते हमलों को अस्वीकार्य बताया है। इन हमलों में भारतीय क्रू मेंबर्स की जान जाने और व्यापारिक मार्गों के बाधित होने के बाद, भारत ने लाइबेरिया के साथ मिलकर 'Group of Friends on Safety & Security of Shipping & Seafarers' की शुरुआत की है। इस पहल को 23 देशों का समर्थन हासिल है।
निवेशकों के लिए सप्लाई चेन रिस्क
निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण ग्लोबल सप्लाई चेन की अस्थिरता है। जब समुद्री रास्तों में सुरक्षा का खतरा बढ़ता है, तो कंपनियों का इंश्योरेंस प्रीमियम और फ्यूल खर्च काफी बढ़ जाता है। जहाजों का रास्ता बदलने या देरी होने से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में इजाफा होता है, जो एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर निर्भर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को 5% से 10% तक प्रभावित कर सकता है।
'4F' क्राइसिस और महंगाई का असर
जयशंकर ने '4F' क्राइसिस (फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर और फाइनेंस) का जिक्र किया है, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ी चुनौती है। भारत एक ऐसा देश है जो इन चीजों के लिए आयात पर निर्भर है। गल्फ या रेड सी में किसी भी तनाव का सीधा असर भारत के फर्टिलाइजर रॉ मटीरियल और एनर्जी सिक्योरिटी पर पड़ता है। अगर फ्यूल और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ते हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय बाजार की महंगाई दर (Inflation) और कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर दिखेगा।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
निवेशकों को कमोडिटी प्राइजिंग और मैरीटाइम सिक्योरिटी से जुड़ी खबरों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। यह सप्लाई चेन के तनाव का सबसे बड़ा इंडिकेटर है। यदि शिपिंग कॉरिडोर में सुरक्षा नहीं सुधरती है, तो लॉजिस्टिक्स खर्च ऊपर बना रहेगा। इसके अलावा, एनर्जी और फर्टिलाइजर सेक्टर की कंपनियों के स्टॉक पर इन जियो-पॉलिटिकल हालातों का असर दिखना तय है।
