विदेश मंत्री S Jaishankar ने मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के साथ मुलाकात के दौरान क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। 26/11 हमलों की सच्चाई के जरिए भारत ने अमेरिका को साफ संकेत दिया है कि पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों पर नई दिल्ली की कड़ी आपत्ति है। निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम अहम है, क्योंकि इसका सीधा असर डिफेंस सेक्टर और भारत की सुरक्षा नीति पर पड़ सकता है।
मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के दौरे के दौरान विदेश मंत्री S Jaishankar ने कूटनीति का एक नया पैंतरा चला। उन्होंने केवल कागजी चर्चा के बजाय सीधे 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के 'ग्राउंड जीरो' का सहारा लिया। जयशंकर ने Rubio की मुलाकात ताज होटल के सुरक्षा प्रमुख सुनील कुड्यादी से करवाई। कुड्यादी ने 60 घंटे तक चले उस खौफनाक मंजर की आपबीती सुनाई, जिससे भारत को होने वाले सुरक्षा जोखिमों की गंभीरता अमेरिकी प्रतिनिधि के सामने पूरी तरह स्पष्ट हो गई।
भू-राजनीति का बदलता समीकरण (Geopolitical Strategy)
यह मुलाकात अमेरिका की उस नीति के खिलाफ एक सीधा संदेश है, जिसके तहत वाशिंगटन पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक और कमर्शियल रिश्ते फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। Rubio ने हालांकि पाकिस्तान के साथ काम करने की मजबूरी—जैसे कि उनका परमाणु जखीरा—का हवाला दिया, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा से समझौता करके कोई भी नजदीकी स्वीकार्य नहीं होगी।
डिफेंस सेक्टर के निवेशकों के लिए संकेत
बाजार और इकोनॉमी के नजरिए से देखें, तो भारत की यह सख्त विदेश नीति डिफेंस सेक्टर के लिए गेम चेंजर हो सकती है। क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच सरकार का डिफेंस बजट पर जोर बना रहने की उम्मीद है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, बॉर्डर सर्विलांस टेक्नोलॉजी और सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ी कंपनियों को लंबे समय में इसका फायदा मिल सकता है।
जैसे-जैसे भारत अमेरिका के साथ डिफेंस को-ऑपरेशन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की दिशा में आगे बढ़ेगा, घरेलू डिफेंस प्रोक्योरमेंट की रफ्तार भी तेज हो सकती है। निवेशकों को आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाले सुरक्षा समझौतों और बजट एलोकेशन पर बारीक नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये फैक्टर्स सीधा मार्केट के रिस्क प्रीमियम को प्रभावित करते हैं।
