UNGA में गूंजेगी एस. जयशंकर की आवाज: क्या क्रूड ऑयल और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ेगा बड़ा असर?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
UNGA में गूंजेगी एस. जयशंकर की आवाज: क्या क्रूड ऑयल और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ेगा बड़ा असर?

विदेश मंत्री S. Jaishankar 26 सितंबर को 81वीं United Nations General Assembly (UNGA) को संबोधित करेंगे। बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच यह संबोधन अहम है, क्योंकि इसका सीधा असर ग्लोबल क्रूड ऑयल और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है, जिस पर भारतीय बाजारों की नजरें टिकी हैं।

विदेश मंत्री S. Jaishankar 26 सितंबर को न्यूयॉर्क में United Nations General Assembly (UNGA) को संबोधित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 81वें सत्र की यह हाई-लेवल जनरल डिबेट 22 से 28 सितंबर तक चलेगी, जिस पर दुनिया भर के ग्लोबल इकोनॉमिक एनालिस्ट्स की नजरें टिकी हुई हैं।

ग्लोबल इकॉनमी पर संकट के बादल

इस साल की चर्चाओं में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे क्षेत्रीय तनाव का दबदबा रहने की उम्मीद है। आर्थिक दृष्टि से देखें तो Hormuz जलडमरूमध्य के पास बढ़ती अनिश्चितता ने ग्लोबल समुद्री व्यापार को जोखिम में डाल दिया है। यह रूट ऊर्जा परिवहन के लिए एक मुख्य धमनी (artery) है। यहाँ किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर ग्लोबल फ्यूल कॉस्ट और फूड प्राइसेज में उछाल लाती है, जो भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव डालती है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

भारतीय निवेशकों और मार्केट ऑब्जर्वर्स के लिए यह इवेंट इसलिए अहम है क्योंकि यह वैश्विक आर्थिक माहौल की स्पष्टता प्रदान करेगा। फ्यूल कॉस्ट में लगातार जारी अस्थिरता कई देशों की इकोनॉमिक रिकवरी में बाधा बनी हुई है। UN Secretary-General Antonio Guterres के कार्यकाल का यह अंतिम बड़ा असेंबली सत्र होगा, जिसमें महामारी की तैयारी और परमाणु निरस्त्रीकरण जैसे बड़े विषयों पर बात होगी।

हालांकि, घरेलू मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए 'ट्रेड स्टेबिलिटी' और 'एनर्जी सिक्योरिटी' ही सबसे बड़ा टेकअवे है। ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भारत का कूटनीतिक रुख यह बताने के लिए काफी होगा कि आने वाले महीनों में सप्लाई चेन की चुनौतियों को कैसे हल किया जाएगा। निवेशकों को सलाह है कि वे संबोधन के बाद की ब्रीफिंग पर नजर रखें, क्योंकि जियोपॉलिटिकल दबाव में किसी भी तरह की कमी ग्लोबल इन्फ्लेशन के लिए राहत की बात हो सकती है, जबकि तनाव बढ़ने से एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अस्थिरता बनी रह सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.