नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदस्य देशों के बीच आर्थिक तालमेल और सप्लाई चेन की मजबूती पर जोर दिया है। 11 देशों वाले इस ब्लॉक में अब भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।
कल से नई दिल्ली में शुरू हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए माहौल तैयार है। आज 'BRICS बिजनेस फोरम' को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्लॉक का एजेंडा सेट कर दिया है। 2026 की अध्यक्षता संभाल रहा भारत इस बार 'रेसिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी' के थीम पर काम कर रहा है। सऊदी अरब, ईरान और UAE के शामिल होने के बाद अब यह ब्लॉक 11 देशों का हो गया है, जो ग्लोबल मार्केट में एक नई ताकत बनकर उभरा है।
सप्लाई चेन की सुरक्षा पर फोकस
विदेश मंत्री का सबसे अहम संदेश सप्लाई चेन की अखंडता को लेकर था। ग्लोबल लेवल पर यूक्रेन और वेस्ट एशिया जैसे क्षेत्रों में जारी तनाव ने एनर्जी इंपोर्ट और कच्चे माल की सप्लाई को अस्थिर कर दिया है। भारत अब एक ऐसी पारदर्शी फ्रेमवर्क की मांग कर रहा है, जिससे भारतीय कंपनियों को अपना कारोबार फैलाने में कम दिक्कतों का सामना करना पड़े।
डिजिटल बदलाव बनेगा नई ताकत
फोरम में टेक्नोलॉजी को भविष्य की ग्रोथ का इंजन बताया गया है। फिनटेक, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों के लिए यह एक बड़ा संकेत है। उम्मीद है कि जल्द ही सदस्य देशों के बीच स्टैंडर्ड डिजिटल फाइनेंस प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी आधारित ट्रेड प्रैक्टिस को लेकर कोई बड़ी डील हो सकती है, जिससे ट्रांजैक्शन कॉस्ट में कमी आएगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
अगले दो दिनों में होने वाली चर्चाओं और साझा बयानों पर बाजार की नजर रहेगी। निवेशकों को खासतौर पर एनर्जी सिक्योरिटी, डिजिटल फाइनेंस और लॉजिस्टिक्स पर आने वाले फैसलों पर गौर करना चाहिए। हालांकि समिट में 'सेल्फ-रिलायंस' (आत्मनिर्भरता) की बात हो रही है, लेकिन ग्लोबल रिस्क के बीच कंपनियां अपनी रिस्क मैनेजमेंट रणनीति को कैसे बदलती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
