S. Jaishankar: ग्लोबल मार्केट की स्थिरता के लिए आतंकवाद पर लगाम जरूरी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
S. Jaishankar: ग्लोबल मार्केट की स्थिरता के लिए आतंकवाद पर लगाम जरूरी

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी की तरह इस्तेमाल करने वाले देशों पर निशाना साधा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यह ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा है। इन्वेस्टर्स के लिए यह बयान अहम है क्योंकि जियोपॉलिटिकल रिस्क अब सीधे तौर पर इकोनॉमिक सेफ्टी और ट्रेड स्टेबिलिटी को प्रभावित कर रहे हैं।

जियोपॉलिटिक्स का बाजार पर असर

नई दिल्ली में 'चिनमय अमृत महोत्सव' के दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar ने आतंकवाद को कूटनीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाले देशों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज की ग्लोबल इकोनॉमी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है, और ऐसे में किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुंचाती है।

इन्वेस्टर्स के लिए क्यों जरूरी है यह संदेश?

इन्वेस्टर्स और बाजार विश्लेषकों के लिए यह बयान एक बड़ा संकेत है। आज के समय में सप्लाई चेन पूरी तरह से ग्लोबल हो चुकी है। वेस्ट एशिया या किसी भी अन्य क्षेत्र में अस्थिरता का असर सीधे तौर पर कमोडिटी प्राइसेज, ट्रेड फ्लो और मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ता है। मंत्री ने साफ किया कि स्थायी विकास के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी ही एकमात्र रास्ता है, न कि सुरक्षा खतरों का इस्तेमाल पॉलिटिकल लाभ के लिए करना।

कूटनीतिक हलचल और भारत का रुख

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता से समझौता करके कोई भी डिप्लोमेटिक फायदा नहीं उठाया जा सकता। फाइनेंशियल नजरिए से देखें तो संघर्ष वाले क्षेत्र निवेश और इकोनॉमिक इंटीग्रेशन में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। आगे चलकर बाजार के दिग्गज इसी बात पर नजर रखेंगे कि ये जियोपॉलिटिकल बदलाव भारत की पॉलिसी और निवेश के माहौल को कैसे आकार देते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.