विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान पाकिस्तान को खुले तौर पर 'आतंकवादी देश' करार दिया है। यह बयान दोनों देशों के बीच सीमा पार आतंकवाद को लेकर जारी कूटनीतिक तनाव के बीच आया है।
न्यूयॉर्क में आयोजित 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब उनसे समुद्री सुरक्षा से जुड़ा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से पाकिस्तान को 'आतंकवादी देश' की संज्ञा दी। यह सार्वजनिक टिप्पणी भारत और पाकिस्तान के बीच गहरे कूटनीतिक अविश्वास को दर्शाता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा का गणित
यह घटना दोनों पड़ोसी देशों के बीच हालिया सैन्य और कूटनीतिक हलचल के बाद हुई है। भारत ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान लगातार आतंकी समूहों को पनाह दे रहा है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। इसी के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था, जो पाकिस्तान के अंदर स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया एक सर्जिकल स्ट्राइक था।
अंतरराष्ट्रीय जांच और आर्थिक प्रभाव
भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रॉक्सी वॉर के खिलाफ दबाव बढ़ाना जारी रखा है। जुलाई 2025 में अमेरिका ने 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) को विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया, जो लश्कर-ए-तैयबा का ही एक प्रॉक्सी हिस्सा है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति भी इस मामले की गंभीरता को स्वीकार कर चुकी है।
मैक्रोइकॉनॉमिक नजरिए से देखें तो, दक्षिण एशिया में बना यह भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना रहता है। जहां पाकिस्तान पहले भी FATF की ग्रे लिस्ट की मार झेल चुका है, वहीं भारत अब आतंकवाद के खिलाफ अपनी स्पष्ट नीति पर कायम है। निवेशकों के लिए इन कूटनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि इनका सीधा असर डिफेंस बजट, रिस्क प्रीमियम और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) के सेंटिमेंट पर पड़ता है।
