S. Jaishankar: रूस के साथ संबंधों पर विदेश मंत्री का बड़ा बयान, एनर्जी सिक्योरिटी बनी प्राथमिकता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
S. Jaishankar: रूस के साथ संबंधों पर विदेश मंत्री का बड़ा बयान, एनर्जी सिक्योरिटी बनी प्राथमिकता

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को फिर से मजबूती दी है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह रुख एनर्जी सिक्योरिटी और ट्रेड डायवर्सिफिकेशन पर फोकस को दर्शाता है, भले ही सरकार को पश्चिमी देशों के भू-राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा हो।

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने रूस के साथ भारत की पुरानी और मजबूत साझेदारी का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत की विदेश नीति बाहरी दबावों के बजाय दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों से संचालित होती है। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में अपने संबोधन में उन्होंने 1971 के संघर्ष जैसे अतीत के सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए रूस को एक भरोसेमंद साथी बताया।

आर्थिक संबंधों की अहमियत

भारत और रूस के बीच रिश्ते अब सिर्फ डिफेंस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एनर्जी और इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी गहरे हो गए हैं। भारत का रूस से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदना एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा कदम है। इससे देश में महंगाई को काबू में रखने में मदद मिल रही है और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर भी सकारात्मक असर पड़ रहा है।

दोनों देशों के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए Chennai-Vladivostok मैरीटाइम कॉरिडोर पर भी काम चल रहा है। इसके अलावा, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से व्यापार के नए रास्ते खुल सकते हैं। वहीं, स्किल्ड लेबर माइग्रेशन पर बनी सहमति से भारतीय कामगारों के लिए रूस में रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

जियोपॉलिटिकल रिस्क और चुनौतियां

हालांकि, यह पार्टनरशिप एक कूटनीतिक संतुलन का खेल है। यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस के साथ लगातार जुड़ाव को लेकर अमेरिका और कई यूरोपीय देशों की नजरें भारत पर रहती हैं। निवेशकों के लिए यह तनाव महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर ट्रेड पॉलिसी और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

इसके अलावा, कुछ ऑपरेशनल रिस्क भी हैं, जैसे कि भारतीय नागरिकों की रूसी सेना में भर्ती का मुद्दा, जिसे सरकार कूटनीतिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश कर रही है। वैश्विक ध्रुवीकरण के इस दौर में किसी भी नॉन-ट्रेडिशनल पार्टनर के साथ काम करने में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंधों का जोखिम हमेशा बना रहता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.