UN जनरल असेंबली में इजरायली पीएम Benjamin Netanyahu के भाषण के दौरान कई राजनयिकों ने वॉकआउट किया। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय निवेशकों के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान उस वक्त हलचल मच गई जब इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के संबोधन के दौरान कई देशों के राजनयिकों ने वॉकआउट कर दिया। यह विरोध इजरायल की सैन्य नीतियों और ईरान के साथ चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष के प्रति बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को दर्शाता है। अपने संबोधन में, पीएम ने सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा के लिए जरूरी बताया, जिस पर वहां मौजूद कई देशों ने कड़ी नाराजगी जताई।\n\n### भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है चिंता?
भारतीय निवेशकों के लिए इस भू-राजनीतिक (Geopolitical) घटना का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ना तेल की कीमतों में अस्थिरता (Volatility) पैदा करता है। तेल के भाव बढ़ने से भारतीय रुपये पर दबाव पड़ता है और एविएशन, पेंट्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं।\n\n### मार्केट पर क्या पड़ेगा असर?\n
यह घटना अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आए बदलाव को दिखाती है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और अमेरिकी प्रशासन के साथ संबंधों के समीकरणों को ग्लोबल मार्केट बारीकी से देख रहा है। निवेशकों के लिए फिलहाल कच्चा तेल और क्षेत्र में तनाव का स्तर ही सबसे बड़े 'मॉनिटरेबल' फैक्टर हैं, क्योंकि ये सीधे तौर पर भारत में इन्फ्लेशन (Inflation) और कॉर्पोरेट लागत को प्रभावित करते हैं।
