Israel ने वेस्ट बैंक में तैनात डच राजनयिकों का डिप्लोमैटिक स्टेटस आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है। यह कदम Netherlands द्वारा इजरायली बस्तियों से आने वाले सामानों पर प्रतिबंध लगाने के बाद उठाया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है।
कूटनीतिक झटका और डेडलाइन
Israel ने वेस्ट बैंक में सक्रिय डच राजनयिकों को झटका देते हुए उनके आधिकारिक दर्जे को समाप्त कर दिया है। विदेश मंत्री Gideon Saar ने साफ कर दिया है कि इन राजनयिकों को 1 सप्ताह के भीतर अपना क्रेडेंशियल्स जमा करना होगा। इस समय सीमा के बाद, ये अधिकारी Vienna Convention के तहत मिलने वाली डिप्लोमैटिक प्रिविलेज और इम्यूनिटी का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
यह कार्रवाई Netherlands द्वारा इजरायली बस्तियों (settlements) से आयातित सामानों पर प्रतिबंध लगाने के जवाब में की गई है। यूरोप के कई देश अब इन इलाकों से आने वाले उत्पादों पर व्यापारिक पाबंदियां लगा रहे हैं। इसी नीति के तहत France, Spain और Ireland जैसे देशों ने भी पहले कदम उठाए हैं, जिससे फॉरेन मिशनों के कामकाज में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
बढ़ता कूटनीतिक टकराव
Israel इस तरह के फैसलों के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है। इसी महीने की शुरुआत में, ब्रिटेन द्वारा सेटलमेंट गुड्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद इजरायल ने पूर्वी यरुशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया था। इसके अलावा, अगस्त में डच अधिकारियों की गाजा में स्थित एक समन्वय केंद्र तक पहुंच भी सीमित कर दी गई थी।
व्यापार पर क्या होगा असर?
ग्लोबल मार्केट और बिजनेस जगत के लिए यह एक संकेत है कि Israel और यूरोप के बीच ट्रेड रिलेशन सख्त हो रहे हैं। सप्लाय चेन और व्यापारिक गलियारों के लिए यह स्थिति अनिश्चितता बढ़ा सकती है। अब सबकी नजरें 1 सप्ताह की डेडलाइन खत्म होने पर टिकी हैं कि डच मिशन अपनी आगे की रणनीति क्या बनाता है और क्या अन्य यूरोपीय देश भी कोई जवाबी कदम उठाते हैं या नहीं।
