27 अक्टूबर को Israel के चुनावों और नवंबर 2026 के US Midterms के बीच ग्लोबल मार्केट पर ईरान के तनाव का साया है। Benjamin Netanyahu और Donald Trump की राजनीतिक चुनौती का असर अब क्रूड ऑयल और सप्लाई चेन पर दिखने लगा है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए इस वक्त का समय काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इस ऑटम में दो बड़े राजनीतिक घटनाक्रम एक साथ आ रहे हैं। 27 अक्टूबर, 2026 को Israel में नेशनल इलेक्शन हैं, जबकि नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन होने वाले हैं। ये राजनीतिक बदलाव Middle East में बढ़ते तनाव के बीच हो रहे हैं, जिसमें Israel और ईरान के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दे सबसे अहम हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Washington और Jerusalem के बीच कूटनीतिक तालमेल में बदलाव आ रहा है। खास बात यह है कि US प्रेसिडेंट Donald Trump ने Benjamin Netanyahu की उम्मीदवारी को खुलकर समर्थन देने से इनकार कर दिया है। अक्टूबर 2023 के सुरक्षा विफलता के बाद से Netanyahu घरेलू दबाव का सामना कर रहे हैं। बाजार इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि इन दोनों नेताओं की फॉरेन पॉलिसी ईरान के प्रति कैसी रहती है।
इस तनाव का सबसे बड़ा असर एनर्जी सिक्योरिटी पर पड़ रहा है। Strait of Hormuz, जो ग्लोबल ऑयल सप्लाई का मुख्य रास्ता है, वहां मिलिट्री हलचल बढ़ गई है। अगर वहां स्थिति बिगड़ती है, तो ग्लोबल क्रूड ऑयल के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर महंगाई और सेंट्रल बैंक की पॉलिसी पर पड़ेगा।
इन्वेस्टर्स के लिए जोखिम यह है कि घरेलू वोट बटोरने की कोशिश में सरकारें फॉरेन पॉलिसी को और आक्रामक बना सकती हैं, जिससे ट्रेड और सप्लाई चेन में अनिश्चितता आ सकती है। जब तक ये दोनों चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की पूरी संभावना है। अब नजरें इन चुनावी नतीजों पर टिकी हैं जो भविष्य की सुरक्षा और डिप्लोमैटिक एजेंडा तय करेंगे।
