इजराइल पुलिस ने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के **27 अक्टूबर** के आम चुनाव में धांधली के आरोपों को खारिज कर दिया है। एजेंसी ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता की पुष्टि की है, जिससे देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के संकेत मिल रहे हैं।
इजराइल पुलिस ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu द्वारा 27 अक्टूबर के आम चुनाव की पारदर्शिता पर उठाए गए सवालों को सिरे से खारिज कर दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसी ने साफ किया है कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष रही, और इसमें किसी भी तरह की सिस्टमेटिक करप्शन या धांधली का कोई सबूत नहीं मिला है।
विवाद की जड़
Likud पार्टी के नेता Netanyahu ने चुनावी अभियान के दौरान लोकतंत्र के खतरे में होने का आरोप लगाया था। उन्होंने Ra'am पार्टी के तीन सदस्यों की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए वोट खरीद के दावे किए थे। पुलिस की जांच में इन दावों का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इन बयानों का मकसद केवल अपने समर्थकों को लामबंद करना था।
राजनीतिक स्थिरता पर असर
देश की 120 सीटों वाली संसद, यानी 'Knesset' में इस समय सरकार गठन को लेकर भारी रस्साकशी चल रही है। 7 अक्टूबर, 2023 की घटनाओं के बाद से पहले ही तनाव झेल रहे इजराइल में अब प्रधानमंत्री और पुलिस विभाग के बीच का यह टकराव जनता के भरोसे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
इन्वेस्टर्स की चिंता का सबसे बड़ा कारण 'पॉलिटिकल ग्रिडलॉक' यानी नीतिगत गतिरोध है। इस तरह के तनाव से विधायी प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं, जिसका असर अंततः इकोनॉमिक पॉलिसी और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ता है। मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर ग्लोबल मार्केट्स में एनर्जी और ट्रेड रूट्स पर पड़ता है, इसलिए आने वाले हफ्तों में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पर बाजार की पैनी नजर बनी रहेगी।
