27 अक्टूबर 2026 के चुनावों में किसी को बहुमत न मिलने के बाद Israel में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई है। PM Benjamin Netanyahu अब एक बड़ी गठबंधन सरकार बनाने की कवायद में जुटे हैं, हालांकि विदेशी हस्तक्षेप के दावों ने माहौल को और गरमा दिया है।
सरकार बनाने की चुनौती
120 सीटों वाली 'नेसेट' (Knesset) में किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद Israel में राजनीतिक स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अपनी सत्ता बचाने के लिए प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अब विरोधियों को एक साथ आकर 'ब्रॉड नेशनल गवर्नमेंट' बनाने का न्योता दिया है। उनका तर्क है कि देश को मौजूदा सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक मजबूत और स्थिर सरकार की जरूरत है।
राष्ट्रपति की भूमिका और आगे की राह
राष्ट्रपति Isaac Herzog को 4 नवंबर 2026 को आधिकारिक चुनावी नतीजे सौंपे जा चुके हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी। फिलहाल, Netanyahu की इस गठबंधन की मांग को एक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि छोटी पार्टियों पर निर्भरता कम हो सके और विपक्ष को अपने साथ आने के लिए मजबूर किया जा सके।
विवादों का दौर
चुनावी नतीजों के बीच Netanyahu ने विदेशी ताकतों द्वारा चुनाव में हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, 'सेंट्रल इलेक्शंस कमिटी' ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कमिटी का साफ कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी रही है और नतीजे पूरी तरह सटीक हैं।
बाजार पर असर
निवेशकों और ग्लोबल मार्केट के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'पॉलिटिकल ग्रिडलॉक' है। अनिश्चितता के इस दौर में सुरक्षा, डिफेंस स्पेंडिंग और ट्रेड पॉलिसी जैसे अहम फैसलों पर ब्रेक लग सकता है। अगर जल्द ही सरकार का गठन नहीं होता, तो मार्केट में अस्थिरता और वोलेटिलिटी बढ़ने की पूरी आशंका बनी हुई है। अब सभी की नजरें राष्ट्रपति के साथ होने वाली बैठकों पर टिकी हैं कि क्या विपक्षी दल अपने रुख में नरमी लाते हैं या देश प्रशासनिक ठप होने की ओर बढ़ेगा।
