27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनावों के बाद Israel में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। किसी भी दल या गठबंधन को जादुई आंकड़ा यानी **61 सीटों** का बहुमत नहीं मिला है, जिससे देश में राजनीतिक गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।
आंकड़ों का गणित और फंसी सरकार
120 सीटों वाली 'नेसेट' (Knesset) में बहुमत के लिए 61 सीटों की दरकार है, लेकिन मौजूदा नतीजों ने सबको चौंका दिया है। बेंजामिन नेतन्याहू की 'लिकुड' (Likud) पार्टी को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गदी आइजनकोट (Gadi Eisenkot) के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटों पर जीत मिली है। शेष 19 सीटें अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के पास हैं, जो अब किंगमेकर की भूमिका में आ गई हैं।
आरोपों का दौर और जांच
नतीजों के बाद चुनावी प्रक्रिया पर सवाल भी उठे हैं। 'लिकुड' पार्टी ने प्रक्रिया में अनियमितताओं का दावा किया था, लेकिन 'सेंट्रल इलेक्शन कमिटी' (Central Elections Committee) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए परिणामों को वैध बताया है। हालांकि, इन दावों ने सत्ता हस्तांतरण के माहौल में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
आगे क्या होगा?
राष्ट्रपति इसाक हरज़ोग (Isaac Herzog) 4 नवंबर, 2026 को राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करेंगे। अगर इस दौर में कोई आम सहमति नहीं बनती है, तो इजरायल में या तो कार्यवाहक सरकार बनेगी या फिर देश को 2027 में एक बार फिर चुनावों का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों और ग्लोबल मार्केट की नजरें इस बातचीत के नतीजों पर टिकी हैं क्योंकि इसका सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।
