इजरायल में **27 अक्टूबर 2026** को होने वाले आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और गदी आइजनकोट के बीच कड़ी टक्कर है। भारतीय निवेशकों के लिए यह चुनाव काफी अहम है, क्योंकि इसका सीधा असर Haifa Port और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर पड़ सकता है।
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले चुनाव मौजूदा सरकार के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा माने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने पूर्व IDF चीफ गदी आइजनकोट की 'यशार' (Yashar) पार्टी कड़ी चुनौती पेश कर रही है। यह चुनाव मुख्य रूप से सरकार की सुरक्षा नीतियों और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर एक जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है।
गठबंधन की पेचीदगियां और अनिश्चितता
इजरायल की संसदीय प्रणाली में 120 सदस्यीय 'नेसेट' (Knesset) में बहुमत के लिए 61 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। किसी एक पार्टी के लिए बहुमत पाना आसान नहीं है, जिससे गठबंधन की सरकार बनाने में काफी समय लग सकता है। यह राजनीतिक अनिश्चितता बाजार और निवेशकों के लिए थोड़े समय तक चिंता का विषय बन सकती है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
भारतीय बाजार के लिए इस चुनाव के नतीजे महत्वपूर्ण हैं क्योंकि:
- Haifa Port: अडानी पोर्ट्स (Adani Ports and Special Economic Zone Ltd) द्वारा संचालित हाइफा पोर्ट भारत के समुद्री व्यापार का एक अहम केंद्र है। सरकार बदलने या नीति में बदलाव का असर इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट के कामकाज पर पड़ सकता है।
- IMEC प्रोजेक्ट: भारत-मध्य पूर्व-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का भविष्य काफी हद तक क्षेत्रीय स्थिरता और राजनयिक तालमेल पर निर्भर है। चुनाव के बाद नई सरकार के नीतिगत रुख का असर इस कॉरिडोर की गति पर दिख सकता है।
फिलहाल, निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि नई सरकार विदेशी निवेश, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर क्या रुख अपनाती है। हालांकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लंबे समय से मजबूत रही है, लेकिन नई सरकार का गठन कितनी जल्दी होता है और उनकी प्राथमिकताएं क्या होती हैं, यह आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करेगा।
